प्रदेश के 14 जिलों में 18 गो संरक्षण केंद्र शुरू किए गए हैं। हर केंद्र में 400 गोवंश को रखा जा सकेगा। बृहस्पितवार को पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने इन केंद्रों का वर्चुअल शुभारंभ किया।
नए केंद्रों में मिर्जापुर में तीन, बरेली एवं कानपुर देहात में दो-दो, आजमगढ़, कासगंज, उन्नाव, बुलन्दशहर, श्रावस्ती, अम्बेकरनगर, बाराबंकी, सुलतानपुर, फिरोजाबाद, रायबरेली एवं बदायूं में एक-एक वृहद गोसंरक्षण केंद्र शुरू किए गए हैं। इन केंद्रों की लागत करीब 28.82 करोड़ है।
केंद्रों का लोकार्पण करते हुए पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि गोवंश के भरण-पोषण, संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। गोआश्रय स्थलों के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि गोशालाओं में गाय भूखी न रहे, चारा, भूसा, प्रकाश एवं दवाइयों की पर्याप्त व्यवस्था हो। उन्होंने बताया कि अब तक 630 वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसके सापेक्ष 421 केंद्रों का निर्माण पूर्ण हो चुका है।
410 वृहद गोसंरक्षण केंद्र क्रियाशील किए जा चुके है। प्रदेश में 0.5 हेक्टेयर भूमि पर स्थायी गोआश्रय स्थल बनाये जाने का निर्णय लिया गया है। पशुधन मंत्री ने 22 जनवरी से आठ मार्च तक चलने वाले राष्ट्रीय खुरपका, मुहपका रोग नियंत्रण अभियान का भी शुभारंभ किया। मौके पर पशुधन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने अधिकारियों से कहा कि गोसंरक्षण केन्द्रों में सभी आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित की जाए और अधिकारी नियमित रूप से गौशालाओं का निरीक्षण करें। मौके पर देवेन्द्र कुमार पांडेय, निदेशक डा मेमपाल सिंह, डा राजेंद्र प्रसाद, अपर निदेशक डा संगीता तिवारी, योजनाधिकारी डा पीके सिंह आदि मौजूद रहे।
