प्रदेश सरकार ने भूमि संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्टांप एवं पंजीकरण विभाग और राजस्व परिषद के संयुक्त प्रयासों से भू-स्वामित्व में नामांतरण की धारा-34 और भू-उपयोग परिवर्तन की धारा 80 की प्रक्रियाओं काे डिजिटल रूप से सरल किया जा रहा है। इसके लिए एनआईसी से विकसित सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रक्रिया को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है।
इस प्रक्रिया को फरवरी 2026 तक पूरा करने की समय सीमा निर्धारित की गई है। योगी सरकार की इस पहल से प्रदेश के लाखों किसानों और उद्योगपतियों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी। इसके साथ ही डिजिटल तकनीक के माध्यम से कार्रवाई भी और अधिक पारदर्शी हो सकेगी। भू-संपत्ति हस्तांतरण के दौरान नामों के बदलाव की धारा-34 के तहत नामांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बनाया जा रहा है।
इसके तहत सभी आवश्यक जानकारियां जैसे- खसरा-खतौनी विवरण, मालिकाना हक के प्रमाण और अन्य अभिलेख ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिये एक ही बार में ली जाएंगी। ऑनलाइन अपलोड होते ही डिजिटल डाटा फ्लो के जरिये अभिलेखों की जांच की जाएगी। इससे कई स्तरों पर फॉर्म भरने, दस्तावेज जमा करने और लेखपाल की रिपोर्ट की प्रतीक्षा में लगने वाले समय में कमी आएगी।
