बाराबंकी की बैंक ऑफ इंडिया की बरौली मलिक शाखा में मुद्रा लोन देने के नाम पर 2.78 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी अंजाम देने के मामले में सीबीआई, लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीबीआई ने मंगलवार को आरोपियों के लखनऊ में चार और मैनपुरी के एक ठिकाने पर छापा मारकर अहम सुबूत भी जुटाए। सीबीआई ने एफआईआर में बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अमन वर्मा, फील्ड अफसर शैलेंद्र प्रताप पंकज और अज्ञात लोगों को नामजद किया है।

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सीबीआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश पर यह एफआईआर दर्ज की है। इस प्रकरण के सामने आने के बाद 21 फरवरी 2024 को तत्कालीन शाखा प्रबंधक राजीव बच्चन ने बाराबंकी के जैदपुर थाने में एफआईआर दर्ज करने के लिए तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया था। बैंक ने सीबीआई को बताया था कि वर्ष 2022-23 में 41 लोगों का मुद्रा लोन तत्कालीन शाखा प्रबंधक अमन वर्मा ने स्वीकृत कर दिया था। बाद में लोन की रकम दूसरे अनाधिकृत खातों में ट्रांसफर कर दी गई, जिससे बैंक को आर्थिक क्षति हुई। उन्होंने सीबीआई ने जिन खातों में रकम ट्रांसफर की गई है, उनसे लोन की रकम वसूलने और रकम निकासी पर रोक लगवाने का अनुरोध भी किया था।

10 लाख तक सिक्योरिटी नहीं

सूत्रों के मुताबिक बिचौलिया सुरेश रावत लोगों का खाता खुलवाने के लिए लाता था और बाद में बैंककर्मियों की मिलीभगत से उनके नाम पर मुद्रा लोन करा देता था। दस लाख रुपये तक के मुद्रा लोन के लिए कोई सिक्योरिटी जमा नहीं होने का फायदा उठाकर यह हेराफेरी अंजाम दी गई। बाद में लोन की रकम नहीं चुकाने पर बाराबंकी के जैदपुर थाने पर एक और सतरिख में दो एफआईआर दर्ज की गई। जिसके बाद पीड़ित सलमान ने हाईकोर्ट की शरण ली। उसने अदालत को बताया कि बैंककर्मियों ने उसका धोखे से हस्ताक्षर लेकर 9.10 लाख रुपये का मुद्रा लोन कर दिया था। इसका पता चलने पर उसने पुलिस में शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।



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