रेल हादसा होने पर अब ड्रोन से भी रिकॉडिंग की जाएगी। इससे एरियल व्यू मिलेगा, जिससे हादसे के नए एंगल भी अफसरों को मिल सकेंगे तथा हादसों की प्रमुख वजहों को जानने-समझने व उससे निपटने की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही फॉरेंसिक जांच भी अनिवार्य रूप से कराई जाएगी।
गत वर्ष गोंडा में हुए चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस हादसे के बाद जांच रिपोर्ट में यह संस्तुति दी गई थी। इस पर रेलवे बोर्ड ने सहमति दे दी है। बोर्ड की सहमति के बाद पूर्वोत्तर रेलवे सहित सभी जोनल रेलवे इस पर अमल करेंगे। इसके साथ ही हादसे के बाद पहुंचने वाली एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (एआरटी) के कर्मचारियों को फॉरेंसिक जांच में दक्ष भी बनाया जाएगा। बोर्ड को भेजी गई रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि सभी एआरटी को इस तरह से तैयार किया जाए कि पांच मिनट के अंदर ब्लॉक सेक्शन तक पहुंच सके।
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एआरटी कर्मचारियों को फॉरेंसिक विशेषज्ञों की ओर से वीडियोग्राफी, साइट अवलोकनों को रिकॉर्ड करने एवं सुरागों के संरक्षण में प्रशिक्षित करना होगा। एआरटी में ड्रोन कैमरे उपलब्ध होने चाहिए, जिससे यातायात बहाली एवं हादसे की जगह की एरियल वीडियोग्राफी हो सके। रोलिंग स्टॉक को स्पष्ट देखा जा सकेगा। जहां रेलवे अफसर नहीं पहुंच सकते, उसकी तस्वीरें भी ली जा सकेंगी। दरसअल, पिछले साल 18 जुलाई को गोंडा से करीब 18 किमी दूर मोतीगंज एवं झिलाही बाजार के बीच चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। छह बोगियां पलट गई थीं। हादसे में चार यात्रियों की मौत हो गई थी. जबकि 25 घायल थे। बचाव कार्य तत्काल शुरू कर दिए गए थे साथ ही सीआरएस जांच भी कराई गई थी।