लगभग डेढ़ दशक बाद भाजपा के प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। 2010 से अब तक संगठन में कई पदाधिकारी महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंत्री और प्रवक्ता जैसे पदों पर लगातार बने हुए हैं। इस दौरान सात प्रदेश अध्यक्ष बदले, लेकिन अधिकांश पदों पर वही चेहरे कायम रहे। इनमें से कई नेता विधायक या विधान परिषद सदस्य भी बन चुके हैं, फिर भी संगठन में उनकी जिम्मेदारियां बनी हुई हैं।

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2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी संगठन में व्यापक बदलाव की योजना पर काम कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इस बार बदलाव केवल औपचारिक नहीं होगा, बल्कि इसका असर जमीनी स्तर पर भी दिखाई देगा। संगठन में जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

दरअसल पिछले वर्षों में प्रदेश अध्यक्ष तो बदलते रहे, लेकिन संगठन के प्रमुख पदों पर पुराने चेहरों की ही पुनरावृत्ति होती रही। इससे क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन प्रभावित हुआ। संगठन में कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर और संत कबीर नगर जैसे कुछ जिलों को अपेक्षाकृत अधिक प्रतिनिधित्व मिला, जबकि कई अन्य क्षेत्रों की अनदेखी होती रही। प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के संगठन तथा सरकार में भी इन जिलों को प्राथमिकता मिलने की चर्चा रही है।



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