प्रदेश में गंगा और यमुना सहित प्रमुख नदियों में प्रदूषण रोकने को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत वाराणसी, आगरा और उन्नाव में चार बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की शुरूआत कर दी गई है। इसके बाद अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शहरों से निकलने वाले सीवरेज को इन नदियों में बिना शोधन के न गिराया जाए। इन एसटीपी का संचालन नमामि गंगे मिशन फेज-2 के तहत किया जाएगा।
यह जानकारी देते हुए राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिन्दर सिंह ने बताया कि आगरा में 842 करोड़ रुपये की लागत से 31 एमएलडी और 35 एमएलडी क्षमता के दो बड़े एसटीपी की शुरूआत हुई है। इससे करीब 25 लाख लोगों को फायदा मिलेगा। इसी तरह वाराणसी के अस्सी-बीएचयू क्षेत्र में 55 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का संचालन शुरू हो गया है। 308 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस एसटीपी से 18 लाख से अधिक लोगों को स्वच्छता और बेहतर अपशिष्ट जल प्रबंधन का लाभ मिलेगा। वहीं, 65 करोड़ रुपये की लागत से 5 एमएलडी क्षमता चौथा एसटीपी उन्नाव के शुक्लागंज में बना है। इससे 3 लाख से अधिक लोगों को लाभ होगा और गंगा में प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगेगी।
परियोजना निदेशक ने बताया कि प्रदेश में सीवर शोधन की कुल 74 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 41 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि बाकी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से शहरी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 152 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं, जिसके जरिए बड़ी मात्रा में सीवेज को शुद्ध कर नदियों में छोड़ा जा रहा है।
