मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति का विवरण दर्ज न करने वाले राज्य कर्मचारियों को सरकार ने 26 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक अंतिम अवसर दिया है। इसके साथ ही स्पष्ट कर दिया गया है कि 31 जनवरी 2026 तक विवरण न देने वाले 47,816 कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी और उनका वेतन रोका जाएगा। हालांकि 10 मार्च तक संपत्ति का विवरण देने वाले अधिकारियों का जनवरी का वेतन जारी कर दिया जाएगा।

मुख्य सचिव एसपी गोयल द्वारा जारी शासनादेश के मुताबिक में बताया गया है कि पूर्व में 24 नवंबर 2025 को जारी आदेश के तहत उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के अनुसार सभी कर्मचारियों को 31 जनवरी 2026 तक अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अनिवार्य रूप से मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करना था।

6 जनवरी 2026 को यह भी स्पष्ट किया गया था कि जो कर्मचारी निर्धारित तिथि तक विवरण अपलोड नहीं करेंगे, उन्हें जनवरी का वेतन फरवरी में नहीं दिया जाएगा। एनआईसी से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 31 जनवरी तक 47,816 कर्मचारियों ने संपत्ति का विवरण अपलोड नहीं किया। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने 26 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक एक बार फिर अवसर प्रदान किया है, लेकिन इसे कड़े प्रतिबंधों के साथ जोड़ा गया है। शासनादेश के अनुसार संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान चयन वर्ष में पदोन्नति पर विचार नहीं किया जाएगा। 

देय होने पर भी इस वर्ष एसीपी का लाभ नहीं दिया जाएगा। विदेश यात्रा, प्रतिनियुक्ति आदि के लिए विजिलेंस क्लीयरेंस नहीं दी जाएगी। यदि किसी कर्मचारी ने विवरण अपलोड नहीं किया है और इसके बावजूद उसका जनवरी 2026 का वेतन आहरित किया गया है, तो संबंधित आहरण-वितरण अधिकारी के विरुद्ध भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जो कर्मचारी 10 मार्च 2026 तक अपना संपत्ति विवरण पोर्टल पर दर्ज कर देंगे, उन्हें जनवरी और फरवरी 2026 का वेतन तत्क्षण भुगतान किया जाएगा। इसके लिए संबंधित आहरण-वितरण अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया गया है।



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