शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ में शंखनाद कर गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध का शंखनाद कर दिया। आशियाना के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक उपवन में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-धर्माचार्य और समर्थक मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा, आज हमें कांशीराम जैसे समर्पण की आवश्यकता है। उन्होंने कांधे पर झोला टांगकर जन कल्याण की राजनीति शुरू की और अपनी शिष्या मायावती को कई बार मुख्यमंत्री बनाया। बोले, हमें सरकारी संतों की जरूरत नहीं बल्कि असरकारी संतों की जरूरत है। उन्होंने कहा, न्याय के मार्ग पर रहकर शासन करो।
कहा, वेद पढ़ने वाले बटुक क्या लाठी और आपके जूते के योग्य थे जो उनके साथ प्रयागराज में अन्याय किया गया। बोले, आपने अपने पंथ को लजवा दिया। इतिहास में कालिख से आपका कृत्य लिखा जायेगा। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानाथ ने कहा, दोहरा चरित्र किसी सन्यासी या योगी का नहीं हो सकता। केवल गो माता की ही रक्षा नहीं बल्कि सनातन की भी रक्षा करनी होगी।
इस धर्म युद्ध में गो रक्षकों को श्रीकृष्ण की भूमिका निभानी है और अर्जुन रूपी जनता को गो रक्षा के युद्ध के लिए राजी करना होगा। कहा, 52 दिन का समय बीच में है। इसमें गीता का ज्ञान चले। उसके बाद 81 दिन की उत्तर प्रदेश की परिक्रमा होगी।
गविष्ठि यात्रा शुरू होगी। गायों के लिए होने वाला युद्ध। गांव-गांव पहुंचेगी टीम। एक लाख आठ गांवों में जाना है। यह गविष्ठि यात्रा 3 मई से 23 जुलाई तक चलेगी। इसका प्रारंभ गोरखपुर से होगा। 23 जुलाई को गोरखपुर में ही संपन्न होगी। 24 जुलाई को फिर से कांशीराम स्मृति स्थल पर ही फिर से सभा होगी।
शंकराचार्य चतुरंगिनी की स्थापना करेंगे
शंकराचार्य ने कहा कि साधु समाज में भी विकृति आ रही है। अखाड़ा परिषद के बहुत से महंतों और साधुओं ने कहा कि हम मुख्यमंत्री के साथ हैं, शंकराचार्य के साथ नहीं हैं। बोले, जब अखाड़े हमारे साथ नहीं हैं तो अब हम अपनी अलग सेना बनाएंगे। कहा, हम शंकराचार्य चतुरंगिनी की स्थापना करेंगे। लेकिन हमारी सेना में आने वाले हर व्यक्ति का पुलिस वेरिफिकेशन कराएंगे।
शंकराचार्य ने पूछा यहां कितने भाजपाई
शंकराचार्य बारी-बारी से लोगों से पूछा कि यहां कितने लोग कांग्रेसी हैं, कितने सपाई, कितने बसपाई हैं और कितने भाजपा वाले हैं? सबसे ज्यादा हाथ भाजपा समर्थकों के उठे। इस पर कहा कि भाजपाई भी हैं तो लोगों ने जवाब दिया कि पहले भाजपाई थे पर अब नहीं हैं। जिस पर शंकराचार्य ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वाले प्रचार कर रहे थे कि हमारा समर्थन कांग्रेसी और सपाई कर रहे हैं लेकिन यहां तो पोल खुल गई।
कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग जगहों से धर्माचार्य और गो रक्षक मंगलवार को ही लखनऊ में जुट गए। गो रक्षा आंदोलन को लेकर शंकराचार्य इन दिनों चर्चा में हैं और गाय को राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं।
