इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के श्रावस्ती में एक गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे की सील हटाने के आदेश के बाद प्रदेश के ऐसे अन्य मदरसों को राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि, अब भी यह सवाल बरकरार है कि क्या नेपाल सीमा के नजदीकी जिलों समेत प्रदेशभर में इसी आधार पर बंद किए गए सैकड़ों मदरसों से सील हट पाएगी।

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उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद से प्रदेश में करीब 16460 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं। मदरसा बोर्ड ने साल 2017 से नए मदरसों को मान्यता पर अघोषित रोक लगा रखी है। इस पर बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन इफि्तखार अहमद जावेद ने शासन को वर्ष 2022 में मानक पूरे करने वाले मदरसों को मान्यता देने के लिए सर्वे कराने का प्रस्ताव भेजा था।

शासन के सर्वे में प्रदेश में 8449 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे और मकतब सामने आए। साल 2024 में तत्कालीन मुख्य सचिव ने सर्वे रिपोर्ट से 4204 गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को चिह्नित कर जिलास्तर पर तीन सदस्यीय कमेटी बनाने का पत्र जिलाधिकारियों को भेजा। इसके बाद जिलों में बनी कमेटियों ने मदरसों का संचालन बंद करने और गैर मुस्लिम बच्चों की सूची उपलब्ध कराने की नोटिस देकर कार्रवाई शुरू कर दी।



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