इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के बंदियों की सजामाफी के मामले में अपर मुख्य सचिव, गृह को ऐसे बंदियों का ब्योरा निजी हलफनामे पर दाखिल करने का निर्देश दिया है, जो जेल में 14 साल पूरे कर चुके हैं। कोर्ट ने इसका भी ब्योरा मांगा है कि बंदियों की सजा माफी पर गौर करने के लिए कितनी अर्जियां या मामले अग्रसारित किए गए और कितने मामलों में सजा माफी मंजूर की गई। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि कानूनों के तहत बंदियों की सजा में छूट की प्रक्रिया के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है और क्या इसकी नियमित रूप से निगरानी की जा रही है या नहीं।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश विजय सिंह परमार की वर्ष 2020 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया। याचिका में कानून के तहत सजायाफ्ता बंदियों की समय पूर्व रिहाई और सजा माफी के प्रावधानों के तहत जेल अफसरों द्वारा दायित्व निर्वहन न पूरा करने77 गया है और इसके लिए उन्हें निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
इस मामले में पहले, वर्ष 2022 में राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल किया गया था, जिसमें, जेल में 14 साल पूरे करने वाले बंदियों का ब्योरा नहीं दिया गया था। साथ ही जवाब में, बंदियों की सजा माफी प्रक्रिया की जानकारी भी नही दी गई थी। इसपर, कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव को ब्यौरे के साथ निजी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए मामले को 23 फरवरी को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
