आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच प्रकृति चुपचाप अपनी शिल्पकारी में जुटी है। विकास की अनदेखी धाराएं आज जेन-जी यानी नव युवाओं की देह में नए आकार गढ़ रही हैं। अनुवंशिक विकास के क्रम में प्रकृति खामोशी के साथ जेन-जी के शरीर में बेहद धीमी गति से मांसपेशियों, हड्डियों, दांतों, आंखों और यहां तक कि दिमाग तक को बदल रही है।
