प्रदेश में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया जल्द शुरू होने जा रही है। इस बार शासन ने अनाथ बच्चों को भी आरटीई के तहत प्रवेश की सुविधा दी गई है। ऐसे बच्चे अपने अभिभावक या संबंधित संस्था के प्रतिनिधि का आधार कार्ड लगाकर प्रवेश पा सकेंगे।

शासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिए बच्चे का दुर्बल वर्ग या वंचित वर्ग से होना अनिवार्य होगा। इसके अंतर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा एचआईवी या कैंसर से पीड़ित माता-पिता अथवा अभिभावक के बच्चे और अनाथ बच्चों को भी प्रवेश का लाभ मिलेगा। अनाथ बच्चे बाल गृह या अनाथ आश्रम में निवासरत हों, तब भी वे पात्र माने जाएंगे।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार इन बच्चों के प्रवेश के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा। वहीं संबंधित बाल गृह या अनाथ आश्रम के प्रमुख का आधार कार्ड प्रवेश प्रक्रिया में मान्य होगा। इससे जरूरतमंद बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का बेहतर अवसर मिल सकेगा और वे शैक्षिक रूप से सशक्त बन सकेंगे।

 प्रवेश के लिए सभी वर्गों के बच्चों के अभिभावकों को आय प्रमाण पत्र सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश संबंधी आवश्यक निर्देश शासन द्वारा जारी कर दिए गए हैं। एनआईसी द्वारा तकनीकी प्रक्रिया पूरी की जा रही है और शीघ्र ही प्रवेश का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आरटीई के अंतर्गत पंजीकृत निजी विद्यालयों की संख्या बढ़कर 68 हजार हो गई है, जिससे बच्चों के लिए प्रवेश के विकल्प और अधिक बढ़ गए हैं।



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