सुबह और शाम मंदिर के बाबा के पास ही जाते थे मनीष
मनीष के चाचा भगवान सिंह ने बताया कि मनीष ज्यादातर अपने काम से काम रखते थे। लोगों से ज्यादा बातचीत भी नहीं करते थे। वह सुबह और शाम मंदिर के बाबा के पास ही जाते थे। तंत्र-मंत्र में पड़ गए थे। इन्हीं कामों में लगे रहते थे।
मनीष ने छोड़ ही दिया था कामकाज
भाई सुधीर ने बताया कि मनीष ने कामकाज तो छोड़ ही दिया था। खेतों पर जाना भी छोड़ दिया था। खेत में ट्यूबवेल था। पहले उसका पानी सिंचाई के लिए बेचते थे, लेकिन बाद में ट्यूबवेल भी बंद कर दिया।
उनका पूरा ध्यान मंदिर की सेवा और भगतई में लगा रहता था। मनीष के कमरे में फ्रिज पर एक परचा मिला, जिस पर आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों की सामग्री लिखी हुई है।
जड़ी बूटियां भी मिलीं
इन जड़ी बूटियों में कांकड़ सिग्धी, मनेसिल, केसर, तगर, कुट, बच आदि लिखी मिलीं। यह सभी जड़ी बूटियां याददाश्त बढ़ाने, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के निदान के उपयोग में लाई जाती हैं।




