कमिश्नरेट पुलिस ने 300 करोड़ से अधिक की ठगी करने वाले साइबर अपराधियों पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। दुबई से गिरोह चलाने वाले सरगना के 24 साथियों को ताजगंज क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। आरोपी लोगों को तरह-तरह से जाल में फंसाकर ठगते थे। खातों में रकम जमा कराने के बाद निकाल लेते थे। इसी तरह छह आरोपी जगदीशपुरा क्षेत्र से पकड़े गए। आरोपी सोशल मीडिया साइट पर आसान तरीके से लोन का झांसा देते थे। खाते में पांच हजार जमा कराते थे। मोबाइल में एक एप डाउनलोड कराने के बाद मोबाइल हैक कर रकम निकाल लेते थे। दो आरोपी किरावली से पकड़े गए।
एडीसीपी क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की ऑनलाइन शिकायत दर्ज होने पर आरोपियों के मोबाइल नंबर की जानकारी गृह मंत्रालय की ओर से साझा की जा रही है। पिछले एक महीने में नेशनल क्राइम रिकाॅर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) पर विभिन्न राज्यों से 600 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई थीं।
इन शिकायतों पर प्रतिबिंब एप से आरोपियों के बारे में जानकारी ली गई। इसके बाद 100 से अधिक लोगों के नाम सामने आए। इनमें से सत्यापन के बाद 32 को थाना जगदीशपुरा, ताजगंज और किरावली में पकड़ा गया। इनके खिलाफ अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। तीनों गिरोह अलग काम करते थे। ताजगंज पुलिस द्वारा गिरफ्तार गिरोह का सरगना नितिन भगाैर है। वह दुबई में रह रहा है। वहीं से पूरा गिरोह चला रहा है।
ऑनलाइन रकम ट्रांसफर कराने पर शिकायतकर्ता का खाता हो गया था फ्रीज
एडीसीपी क्राइम ने बताया कि ताजगंज पुलिस को एनसीआरबी पोर्टल पर एक शिकायत मिली थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि वह 15 जून को एटीएम से रुपये निकालने गया था। तभी एक युवक मिला। उसने डेबिट कार्ड नहीं होने की बात कहकर ऑनलाइन रुपये लेकर नकद देने की प्रार्थना की। उन्होंने 36 हजार रुपये ऑनलाइन लेकर उसे एटीएम से निकालकर दे दिए। कुछ दिन बाद उनका बैंक खाता पुलिस ने होल्ड करा दिया। जानकारी हुई कि उनके खाते में भेजी गई रकम साइबर ठगी की थी। पुलिस को जांच में रुपये भेजने वाले का नंबर किरावली निवासी रिषी का पता चला। उस नंबर से लिंक बैंक खाते पर एनसीआरबी पोर्टल पर 54 शिकायतें दर्ज मिलीं। आरोपी के एक बड़े संगठित गिरोह में शामिल होने का पता चला। इस पर उसके तीन साथियों को गिरफ्तार किया गया। उनकी निशानदेही पर 21 अन्य को पकड़ा गया।
आठवीं फेल नितिन भगाैर दुबई से चला रहा गिरोह
एडीसीपी ने बताया कि पूछताछ में सामने आया कि ताजगंज पुलिस की गिरफ्त में आए सभी आरोपी न्यू सुरक्षा विहार के निवासी नितिन भगौर और ताजगंज स्थित गोबर चौकी निवासी रवि राठौर के लिए काम करते हैं। साइबर ठगों के गैंग का सरगना नितिन भगौर कुछ वर्षों पहले मामूली व्यक्ति था। वह आठवीं फेल है। साइबर फ्राड शुरू करने के बाद वह दुबई में रहने लगा। भारत में गैंग की कमान उसने रवि राठौर को दे दी। दुबई में एक बोगस कंपनी मेडलर ग्लोबल एक्सीलेंस, मेडलर सर्विस ग्रुप बना कर साइबर अपराध का किंग बन गया। भारत के लोगों से ठगे रुपये अपनी कंपनी के खातों में मंगाकर उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में कन्वर्ट कर करोड़ों रुपये का मालिक बन गया। पुलिस को रवि राठौर की लोकेशन मिल गई है। उसकी गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस नितिन भगौर का रेड कार्नर नोटिस जारी करवाने और भारत प्रत्यर्पण करने की कार्रवाई कर रही है।
