दो वर्ष पहले निशुल्क सिलाई प्रशिक्षण केंद्र खोल कर चंद महिलाओं को प्रशिक्षित किया। फिर इन्हीं चंद महिलाओं की मदद से 450 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार दिया। इनमें सौ से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर सिलाई करके अपना जीवन यापन कर रही हैं।

घर परिवार में रहकर आर्थिक हालातों के बीच संघर्ष कर रहीं महिआओं ने सिलाई सीखकर अपनी जिंदगी को संवार लिया है। सैकड़ों महिलाओं का जीवन बदलने वालीं राधिका चौधरी शहर के बीएसए रोड पर राधिका बिहार में रहती हैं। सौंख के अहमल की नगरिया से निकल कर उन्होंने यहां मकान बनाया। इसी मकान में निशुल्क सिलाई प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की।

शुरुआती दिनों में चंद महिलाओं ने आकर सिलाई सीखी। फिर इन्हीं महिलाओं की मदद से पड़ोस की काॅलोनी में जाकर एक और निशुल्क सिलाई केंद्र खोला। पति का साथ मिला तो राधिका ने बीएसए रोड पर जनक पुरी, आनंद पुरी, कृष्णा बिहार, राधिका बिहार और ज्योति नगर में केंद्र खोल कर 450 महिलाओं को सिलाई कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया। इनमें से सौ से ज्यादा महिलाएं आज अपना खुद का सिलाई केंद्र खोलकर अपना जीवन यापन कर रही हैं।

राधिका चौधरी कहती हैं कि सिलाई एक ऐसा काम है, जो परिवार के बीच रह कर भी किया जा सकता है। महिलाओं को अपने निजी खर्च के लिए पैसे चाहिए होते हैं। ऐसे में इसे परिवार के लिए अतिरिक्त आय का स्त्रोत कह सकते हैं।

कृष्णा चौहान ने बताया कि परिवार में आर्थिक तंगी से जूझ रही थी। एक सहेली ने इस केंद्र के बारे में बताया। यहां आकर प्रशिक्षण प्राप्त किया। सिलाई से आमदनी हो रही है।

सुमन गौतम का कहना है कि पहले सिलाई सीखी, अब स्वयं सिलाई कर रहीं हूं। सिलाई की आमदनी से परिवार की परेशानियां दूर हुईं। समय मिलने पर अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण भी देती हूं।

ज्योति चौधरी ने बताया कि गृहस्थी में सिर्फ गृहणी के रुप में लोग जानते हैं। लेकिन अब पेशेवर के रुप में अपनी पहचान है। कोई टेलर दीदी या मैडम कहते हैं तो अच्छा लगता है।

रीमा गौतम ने कहा कि फैशन के इस दौर में कितने ही ब्रांड बाजार में आ जाएं, लेकिन हर सूट या ब्लाउज की सही फिटिंग करानी ही पड़ती है। काॅलौनी या मोहल्ले की दुकानें कभी खत्म नहीं होगीं।

प्रियंका शर्मा ने बताया कि मानव जीवन में कपड़े का दूसरा स्थान है। कपड़ों की सिलाई कभी बंद नहीं होगी। अच्छा बुटीक हो तो हर दिन की आमदनी भी बेहतर होती है।

 



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