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रक्षाबंधन 30 अगस्त की रात से 31 की सुबह तक मनाया जाएगा। राजधानी के ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि भद्राकाल की वजह से ऐसा होगा। उनका कहना है कि राखी का त्योहार हमेशा ही भद्रामुक्त काल में मनाया जाता है और शुभ मुहूर्त में ही बहनें राखी बांधती हैं।

ज्योतिषाचार्य धीरेंद्र पांडेय के मुताबिक, 30 अगस्त की सुबह 10.13 बजे पूर्णिमा शुरू हो जाएगी, लेकिन भद्रा का साया रहेगा। भद्रा रात 8 बजकर 57 मिनट पर खत्म होगी। 31 अगस्त की सुबह उदया तिथि में पूर्णिमा का मान 7.46 बजे तक रहेगा। यह सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। ज्योतिषाचार्य राधेश्याम शास्त्री के मुताबिक, भद्रा के कारण रक्षाबंधन 30 की सुबह से शुरू हुई पूर्णिमा में नहीं मनाया जा सकता है। उदया तिथि में ही मान होता है। काशी के ज्योतिषाचार्य रंगनाथ उपाध्याय कहते हैं कि उदया तिथि के मान के अनुसार, रक्षाबंधन का त्योहार 31 अगस्त को ही मनाया जाएगा।

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दो दिन रक्षाबंधन को लेकर पिछले साल भी रही थी ऊहापोह की स्थिति

पिछले साल भी रक्षाबंधन 11 या 12 अगस्त को मनाए जाने को लेकर जबर्दस्त ऊहापोह की स्थिति रही थी। लखनऊ से लेकर काशी तक गहन मंथन के बाद तय हुआ था कि राखी 11 अगस्त को ही मनाई जाएगी। तब स्वर्गलोक की भद्रा बताकर उसके दोष को नजरअंदाज कर दिया गया था। तब ज्योतिषाचार्यों का मत था कि 11 को त्योहार मनाने में भद्रा बाधक नहीं है।



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