चीन से 1962 की जंग के बाद तत्कालीन वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने रक्षा बजट पर विशेष ध्यान दिया था। उन्होंने युद्ध के बाद अर्थव्यवस्था खराब स्थित में पहुंचने पर भी रक्षा पर अधिक व्यय करने का फैसला लिया। जब 1963 का रक्षा बजट पेश किया गया तो पिछले वर्ष के बजट से 527 करोड़ अधिक (867 करोड़ रुपये) का बजट रक्षा व्यवस्था पर खर्च करने के लिए रखा।
यह एक वर्ष में रक्षा के लिए खर्च में बढ़ाई गई दोगुनी रकम से भी ज्यादा थी। इसके लिए उन्होंने 275 करोड़ रुपये के नए कर लगाए। जिसका सभी दलों ने एक स्वर में समर्थन किया था। अमर उजाला के 15 मार्च 1962 और 1 मार्च 1963 में प्रकाशित खबरों के अनुसार आम बजट 1962-63 में वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने 340़ 67 करोड़ रुपये का रक्षा बजट पेश किया था।
इसके बाद अक्तूबर-नवंबर माह में चीन के साथ जंग हो गई। उसके परिणाम आने के बाद देश की सरकार ने रक्षा पर अधिक व्यय करने का फैसला लिया। बजट की राशि को दोगुने से भी अधिक बढ़ा दिया। 1 मार्च के अंक में प्रकाशित खबर के अनुसार तत्कालीन वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने 275़ 50 करोड़ के नए कर लागू किए। जो देश के इतिहास में एक साथ इतनी वृद्धि किसी वित्तमंत्री ने नहीं की थी। रक्षा के लिए 867 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया।