उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के लिए शुरू किए गए कई नए राजकीय कॉलेजों में सन्नाटा पसरा है। कभी शिक्षा का केंद्र रही नैमिषारण्य की भूमि भी संकट से जूझ रही है। यहां ठाकुर नगर स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय मिश्रिख, सीतापुर का हाल कुछ रायबरेली के हरीपुर निहस्था स्थित राजकीय महाविद्यालय जैसा ही है। लगभग 8.74 करोड़ की लागत से तैयार हुए इस महाविद्यालय में 2025 में पढ़ाई शुरू हो सकी।

जून में प्राचार्य व शिक्षकों की नियुक्ति हुई और जुलाई में सत्र शुरू हुआ। वर्तमान में यहां पर प्राचार्य समेत 7 शिक्षक तैनात हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्धता लेने के बाद बीए, बीएससी, बीकॉम स्ट्रीम की पढ़ाई शुरू की गई। पहले साल मात्र 15 प्रवेश हुए। इसमें बीए में 14 छात्राएं, बीएससी में एक छात्रा और बीकॉम में कोई दाखिला नहीं हुआ।

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कालेज के शिक्षक बताते हैं कि महाविद्यालय में 2025 में पढ़ाई शुरू हुई। इससे काफी लोगों को कॉलेज संचालन की जानकारी नहीं हो पाई। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि पिछले दिनों विभाग के लोगों ने सुझाव दिया था कि अभी यह गर्ल्स कॉलेज है। अगर इसमें छात्र-छात्राओं दोनों का प्रवेश होगा तो संख्या बढ़ेगी। ऐसे में वे कोएड के लिए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के पास प्रस्ताव भेजेंगे। वह शासन से इसके लिए प्रयास करेंगे।

मुख्य मार्ग से दो किमी दूर, पानी की व्यवस्था सीमित

सीतापुर-हरदोई मुख्य मार्ग से लगभग दो किलोमीटर अंदर इस महाविद्यालय तक जाने के लिए सिंगल लेन सड़क है। सड़क टूटी है और नियमित टैक्सी भी नहीं चलती। ई-रिक्शा से कॉलेज जाना पड़ता है। पास में एक ही बड़ी आबादी वाला गांव ठाकुर नगर है। कॉलेज थोड़ा आउटर में पड़ता है। इसका असर यहां के प्रवेश पर दिखता है। पिछड़ा क्षेत्र होने की बानगी ऐसी है कि दो छात्राएं आधी फीस भी जमा नहीं कर सकीं। कॉलेज प्रशासन ने ही इनकी बकाया फीस जमा की। कॉलेज के पास ही थाना है और पीछे की तरफ हेलीपैड है। इस वजह से पानी की टंकी नहीं बनने से पानी की दिक्कत भी है। जिलाधिकारी द्वारा पत्र लिखा गया है। अब अंडरग्राउंड पानी की टंकी बनाने की तैयारी है।



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