राम मंदिर आंदोलन के योद्धा डॉ. वेदांती का परलोक गमन हो गया है। ऐसे में लोग उनकी बातों और उनके साथ बिताए समय को याद कर रहे हैं। उनके शिष्य ने बताया कि गोलीकांड और राजनीतिक दबाव से भी उनका संकल्प नहीं डिगा था। उनके बयान से कोर्ट में हलचल मच गई थी। आगे पढ़ें पूरी खबर…


Ram Temple movement stalwart Dr. Vedanti said in court that we demolished ruins of temple not mosque

राम मंदिर आंदोलन के योद्धा डॉ. राम विलास दास वेदांती का निधन।
– फोटो : अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी



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रामनगरी अयोध्या में पूर्व सांसद डॉ. राम विलास दास वेदांती लंबे समय तक राम मंदिर आंदोलन के अग्रिम पंक्ति के योद्धा बने रहे। वह मंदिर आंदोलन के अहम किरदारों में से एक थे। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उन्होंने मंदिर आंदोलन की लौ बुझने नहीं दी। अब उस योद्धा का परलोक गमन हो गया है तो मंदिर आंदोलन में उनके योगदान को याद करना मौजू हो उठता है। छह दिसंबर 1992 को हुई बाबरी विध्वंस की घटना के मुख्य आरोपियों में वह शामिल थे। वह हमेशा कहते थे कि हमने मस्जिद नहीं मंदिर के खंडहर को तोड़ा।

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उनके शिष्य व उत्तराधिकारी डॉ. राघवेश दास वेदांती बताते हैं कि बाबरी विध्वंस मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और उनके गुरु राम विलास दास वेदांती समेत 32 लोग आरोपी थे। बाबरी विध्वंस मामले में फैसला आने के चार माह पूर्व उन्होंने कोर्ट में बयान दिया था। 

 



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