Abdul Rehman silver medal karate Kolkata की यह खबर रोहाना Muzaffarnagar क्षेत्र और पूरे जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है। थाना शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव बडकली निवासी 17 वर्षीय अब्दुल रहमान ने कोलकाता के हावड़ा में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की कराटे प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया और सिल्वर मेडल जीतकर अपने गांव और परिवार का नाम रोशन किया। जैसे ही वह मेडल लेकर गांव पहुंचे, पूरा माहौल उत्सव में बदल गया—फूलों की मालाएं, मिठाइयों की मिठास और बधाइयों की गूंज हर गली में सुनाई दी।


🔴 गांव बडकली में ऐतिहासिक स्वागत, खुशी की लहर

अब्दुल रहमान की जीत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, ग्रामीणों में उत्साह की लहर दौड़ गई। उनके घर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई। किसी ने फूलमालाएं पहनाईं, तो किसी ने मिठाई खिलाकर जीत का जश्न मनाया। बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक, हर कोई इस युवा खिलाड़ी की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा था।

ग्रामीणों का कहना है कि अब्दुल रहमान की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि छोटे गांवों से भी बड़े सपने और राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां निकल सकती हैं।


🔴 हावड़ा, कोलकाता में हुआ बड़ा मुकाबला

अब्दुल रहमान ने बताया कि हावड़ा कोलकाता स्टेडियम में आयोजित इस कराटे प्रतियोगिता में देश के 17 राज्यों से खिलाड़ी पहुंचे थे। हर राज्य के प्रतिभागी अपने-अपने क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। मुकाबले बेहद कड़े थे, लेकिन अब्दुल रहमान ने धैर्य, तकनीक और आत्मविश्वास के साथ हर चुनौती का सामना किया।

उन्होंने कहा कि फाइनल राउंड तक पहुंचना उनके लिए एक बड़ा अनुभव था और सिल्वर मेडल जीतना उनके करियर का अब तक का सबसे यादगार पल बन गया।


🔴 तीन महीने की कड़ी मेहनत, बना जीत का रास्ता

अब्दुल रहमान ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने कोच सिहान बसंत उपाध्याय और परिवार को दिया। उन्होंने बताया कि देवबंद स्थित बसंत उपाध्याय एकेडमी में उन्होंने पिछले तीन महीनों तक लगातार अभ्यास किया। सुबह की ट्रेनिंग से लेकर शाम के तकनीकी सत्र तक, हर दिन उन्होंने खुद को बेहतर बनाने की कोशिश की।

उनके अनुसार, कोच की रणनीति, फिटनेस पर जोर और मानसिक तैयारी ने उन्हें इस स्तर तक पहुंचने में मदद की।


🔴 पिता इदरीश का गर्व और भावुक क्षण

अब्दुल रहमान के पिता इदरीश ने बताया कि बेटे की इस जीत ने पूरे परिवार को गर्व से भर दिया है। उन्होंने कहा कि जब अब्दुल रहमान गांव लौटे और लोगों ने फूलमालाएं पहनाकर स्वागत किया, तो यह पल उनके लिए शब्दों में बयां करना मुश्किल था।

इदरीश ने कहा कि उनका बेटा हमेशा से मेहनती रहा है और आज उसकी मेहनत रंग लाई है। उन्होंने अन्य अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों को खेल और पढ़ाई दोनों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।


🔴 ग्रामीणों की बधाइयों का सिलसिला जारी

ग्रामीण अक्की त्यागी ने बताया कि छोटे भाई अब्दुल रहमान की इस उपलब्धि पर पूरा गांव खुश है। लोग लगातार उनके घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं।

गांव के कई युवाओं ने कहा कि अब्दुल रहमान की जीत उन्हें भी खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है। उनका मानना है कि यह सफलता गांव के बच्चों के लिए एक नई राह खोलेगी।


🔴 जिले के लिए गौरव का पल

Abdul Rehman silver medal karate Kolkata की यह उपलब्धि केवल बडकली गांव तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है। स्थानीय खेल प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने भी अब्दुल रहमान को सम्मानित करने की बात कही है।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलते रहें, तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम रोशन कर सकते हैं।


🔴 युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत

अब्दुल रहमान की कहानी यह संदेश देती है कि साधन सीमित होने के बावजूद अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता जरूर मिलती है। गांव के स्कूलों और खेल क्लबों में उनकी उपलब्धि को उदाहरण के रूप में बताया जा रहा है, ताकि बच्चे खेलों के प्रति गंभीरता से आगे बढ़ें।

उनकी जीत ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकती हैं।


🔴 आगे का सपना: गोल्ड की ओर कदम

अब्दुल रहमान ने कहा कि सिल्वर मेडल उनके लिए एक शुरुआत है। उनका अगला लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है। इसके लिए वह अपनी ट्रेनिंग और भी कड़ी करने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उनके गांव और जिले के और भी बच्चे खेलों की दुनिया में आगे बढ़ें और देश का नाम रोशन करें।


रोहाना के गांव बडकली से निकली यह सफलता की कहानी केवल एक सिल्वर मेडल की नहीं, बल्कि उस विश्वास की है जो मेहनत, अनुशासन और सपनों को पंख देता है। अब्दुल रहमान की यह जीत जिले के युवाओं के लिए नई प्रेरणा बन गई है—एक ऐसा संदेश कि अगर हौसले बुलंद हों, तो हर मंच पर परचम लहराया जा सकता है।

 



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