हम गूगल मैप से रास्ता देख रहे थे। लेह-मनाली मार्ग पर आए। सड़क पर काफी बर्फबारी हो रही थी। इससे फिसलन हो गई थी। अचानक कार फिसलने लगी। हम संभल भी नहीं पाए। कार 20 फीट गहरी खाई में जा गिरी। गनीमत रही कि जान बच गई। रात में तापमान भी माइनस 20 डिग्री तक पहुंच गया। कड़ाके की ठंड में एक साथ रहे। एक झोपड़ी में शरण ली। बाद में पुलिस ने मदद की। लद्दाख घूमने के बाद लापता हुए चारों युवकों ने यह आपबीती सुनाई। उनके घर आने के बाद परिवार में खुशी का माहाैल है।
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लद्दाख में चलाया गया सर्च ऑपरेशन
– फोटो : अमर उजाला
सदर क्षेत्र के रहने वाले जयवीर, शिवम, यश मित्तल और सुधांशु 6 जनवरी को लद्दाख घूमने गए थे। 9 जनवरी को पैंगोंग झील देखने के बाद वापस आ रहे थे। तभी हादसे का शिकार हो गए। 13 जनवरी को वह पुलिस को मिले और बृहस्पतिवार रात 8:30 बजे वह परिजन के साथ आगरा पहुंचे। उन्हें देखकर परिजन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। शिवम के ममेरे भाई जयपाल सिंह चाैधरी ने बताया कि शिवम अपनी गाड़ी लेकर गया था। चारों दोस्त अपने साथ खाने-पीने के सामान के साथ चूल्हा और गैस का छोटा सिलिंडर लेकर गए थे। वह श्रीनगर के रास्ते से लद्दाख पहुंचे थे। गूगल मैप के सहारे ही चल रहे थे। उसी से मुख्य रास्ते से अलग हो गए और सुनसान रास्ते पर पहुंच गए।
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लद्दाख में चलाया गया सर्च ऑपरेशन
– फोटो : अमर उजाला
हेल्प लिखकर पेड़ों पर लगा दिए थे कागज
शिवम ने परिजन को बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि कोई आएगा तो कार सहित बाहर निकालने में मदद कर देगा। बाद में कागज निकालकर जगह जगह हेल्प लिखा और पेड़ों पर लगा दिया। उनके पास खाना और गैस खत्म हो रही थी। कार में डीजल खत्म हो गया तो दो दिन बाद कार से उतरे। कई किलोमीटर पैदल चलने के बाद उन्हें बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन के जवान मिले। उनकी झोंपड़ी में रुक गए। तब पुलिस की मदद मिल सकी।
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– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक-एक दिन काटना हो रहा था मुश्किल
सुधांशु फाैजदार नगला वृंदावन, काैलक्खा का रहने वाला है। वहीं यश मित्तल नरोत्तम कुंज, ग्वालियर रोड पर रहता है। उसके पिता मनीष मित्तल कपड़ा कारोबारी हैं। जयवीर के पिता की मां पीतांबरा के नाम से ट्रांसपोर्ट है। वहीं शिवम के पिता बिल्डर हैं। बृहस्पतिवार रात 8:30 बजे चारों दोस्त घर पहुंचे। उन्हें वापस लाने के लिए आठ परिजन गए थे। परिजन का कहना था कि एक-एक दिन काटना मुश्किल हो रहा था। बच्चों से संपर्क नहीं होने पर वह तलाश में निकल गए थे। पुलिस ने फोन करके उनके सकुशल होने की जानकारी दी। तब दिल को चैन आया।
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– फोटो : अमर उजाला
बर्फ को गर्म करके पी रहे थे पानी
शिवम के पिता दौलत राम ने बताया कि बच्चों को बचने की उम्मीद नहीं थी। पुलिस ने काफी मदद की। उन्हें खाना-पानी दिया। मेडिकल चेकअप भी कराया गया। बेटे ने बताया कि उनके पास पानी खत्म हो गया था। इसलिए बर्फ को पिघलाकर पानी पी रहे थे। ऊपर से निकल रहे हेलिकॉप्टर को देखकर लाल रंग का कपड़ा दिखाया, पर मदद नहीं मिली। बाद में रास्ते में एक पत्थर पर हेल्प लिखकर रखा। तब पुलिस ने आकर जान बचाई।