आयोग ने पीड़ित सिख परिवार की शिकायत पर बीते साल 20 मार्च को दिल्ली में सुनवाई की थी जिसमें पीड़ित ने आरोप लगाए कि लाभचंद मार्केट के पट्टाधारक विनय चंद जैन का एक बेटा आईएएस है। वह अपने रसूख का दुरुपयोग कर रहा है। अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पिता के लिए कम कीमत पर लीज का नवीनीकरण कराया। आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी की बात स्वीकार करते हुए योगी सरकार को तत्काल सुधार के निर्देश दिए थे।
नाै रुपये सालाना पर लीज का खेल
शिकायतकर्ता नेहरू नगर निवासी सरदार रवनीत सिंह ने आयोग को बताया कि विनय चंद जैन और उनके पुत्र आईएएस अधिकारी संदीप जैन ने अन्य प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाकर राजा की मंडी स्थित लाभचंद मार्केट की सरकारी भूमि को मात्र नौ रुपये प्रति वर्ष की मामूली दर पर अपने नाम आवंटित करा लिया। जिस जमीन पर उनके दादा सरदार अजब सिंह को 1950 में विधिवत दुकान आवंटित की गई थी, उस पूरी बिल्डिंग और सार्वजनिक सड़क की जमीन को धोखाधड़ी और रसूख के बल पर लीज पर ले लिया गया।
अल्पसंख्यक आयोग ने की थी कड़ी टिप्पणी
आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा की बेंच ने सुनवाई के दौरान माना था कि प्रथम दृष्टया सरकारी भूमि और सार्वजनिक सड़क का दुरुपयोग हुआ है। आयोग ने कहा कि 1952 से कानूनी तौर पर काबिज उप-किरायेदारों (सिख परिवार) को उजाड़ने की कोशिश करना अनुचित है। आयोग ने सिफारिश की थी कि राज्य सरकार इस भूमि को वापस अपने कब्जे में ले और प्रभावित पक्ष को उचित मुआवजा देते हुए किसी अन्य स्थान पर पुनर्वासित करे। सुनवाई के दौरान नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव के गैर हाजिर रहने पर आयोग ने नाराजगी जाहिर की थी और मुख्य सचिव को पुलिस के माध्यम से समन जारी कर 7 अप्रैल 2025 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था। मुख्य सचिव के तलब होने से महज 48 घंटे पहले यानी 5 अप्रैल 2025 को नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने लाभचंद मार्केट का पट्टा शर्तों के उल्लंघन के मामले में निरस्त कर दिया था।
उल्लंघन पर निरस्त किया था पट्टा
नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने कहा कि जांच के दौरान पट्टे की शर्तों का खुला उल्लंघन सामने आया था। इस प्रक्रिया के दौरान सिफारिशी फोन आए। यहां तक कि मेरी झूठी शिकायतें भी की गईं लेकिन नियमों के पालन के तहत पट्टा निरस्तीकरण की कार्रवाई सुनिश्चित की गई थी।
एक पक्षीय कार्रवाई, झूठे आरोप
पट्टाधारक विनय चंद जैन के बेटे प्रदीप जैन ने कहा कि अल्पसंख्यक आयोग के आदेश पर एक पक्षीय कार्रवाई की गई। मेरे भाई पर लगे सभी आरोप झूठे हैं। आयोग के आदेश के विरुद्ध अपील की गई है। नगर निगम से नक्शा पास है। होटल का लाइसेंस भी निगम से मिला था। भूमि किसी को किराये पर नहीं की गई।
