मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar): विजयदशमी का पर्व इस वर्ष विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने शताब्दी वर्ष को मना रहा है। इस अवसर पर संघ द्वारा विजयदशमी उत्सव के आयोजन के लिए विभिन्न स्थानों पर विशेष तैयारियाँ की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य संघ के 100 वर्षों के संघर्ष और सेवा कार्यों को समर्पित करना है, साथ ही समाज में एकता, सेवा, और राष्ट्रभक्ति की भावना को बढ़ावा देना है।

विजयदशमी के लिए पथ संचलन की योजना

विजयदशमी उत्सव के अंतर्गत विभिन्न मंडलों और बस्तियों में पथ संचलन आयोजित किए जाने की योजना है। शंकर बस्ती (गऊशाला नदी रोड) में स्थित प्राचीन बामन जी मंदिर से भव्य पथ संचलन की शुरुआत की जाएगी। यह पथ संचलन बस्ती के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरते हुए बामन मंदिर में समाप्त होगा। आयोजन के दौरान स्थानीय लोग संघ के स्वयंसेवकों का उत्साह बढ़ाएंगे और उनके कार्यों के प्रति आभार व्यक्त करेंगे।

कार्यक्रम की शुरुआत और बौद्धिक सत्र

इस आयोजन की शुरुआत हनुमाननगर के संघ चालक श्रीपाल जी द्वारा दीप जलाकर की जाएगी। इसके बाद एक बौद्धिक सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र सह संपर्क प्रमुख श्री हरीश रौतेला जी अपने विचार साझा करेंगे। वे संघ के 100 वर्षों के संघर्ष, सेवा कार्यों और राष्ट्रभक्ति की भावना पर चर्चा करेंगे। उनका मुख्य उद्देश्य संघ के संस्थापक डॉ. हेडगवार जी के विचारों को समाज के सामने लाना है, जिन्होंने भारतीय समाज को जाति-पांति से ऊपर उठाकर एकजुट करने का प्रयास किया था।

संघ के 100 वर्षों का संघर्ष और योगदान

श्री रौतेला जी विजयदशमी के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे और बताएंगे कि संघ ने 100 वर्षों में देश की सेवा में किस प्रकार योगदान दिया है। विशेष रूप से विपदा के समय, चाहे वह प्राकृतिक आपदाएँ हों या राष्ट्र के लिए कोई संकट, संघ के स्वयंसेवकों ने हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी बताया कि यदि समाज पंच परवर्तनों को अपनाए तो भारत को समग्र राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता।

पचेडा रोड, अंकित बिहार और बचन सिंह कॉलोनी में पथ संचलन

इसके अलावा, पचेडा रोड, अंकित बिहार और बचन सिंह कॉलोनी में भी पथ संचलन का आयोजन किया जाएगा। इन स्थानों पर श्री राजसिंह जी का बौद्धिक सत्र होगा, जिसमें वे संघ के योगदान और समाज में बदलाव के लिए जरूरी पहलुओं पर चर्चा करेंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में एकता, जागरूकता और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित किया जाएगा।

जिले के अन्य क्षेत्रों में कार्यक्रमों की योजना

मुजफ्फरनगर के विभिन्न अन्य क्षेत्रों जैसे मीरा पुर, खुसरोपुर, मेघाखेड़ी, घटायन, सिसोली भोराकला, पुरबालियान, छपार, बसेड़ा, बरला, जौला, कुरथल, दुर्गनपुर, चन्दन हरनंदेश्वर, शिवाजी रामनगर, नई मंडी, सुरेंद्रनगर, वहलना, एकता विहार, कृष्णापुरी, प्रेमपुरी, गौशाला, सावरकर कृष्णापुरी और मोरना में भी विजयदशमी के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में पथ संचलन के अलावा बौद्धिक सत्र और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना है।

समाज में एकता और भाईचारे का संदेश

विजयदशमी के इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देना है। संघ द्वारा आयोजित किए जा रहे इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोग न केवल एकजुट होंगे, बल्कि राष्ट्रीय एकता, सेवा और स्वदेशी के विचारों को भी समझेंगे। संघ के स्वयंसेवक हमेशा से निस्वार्थ सेवा में विश्वास रखते आए हैं, और यह आयोजन उनके उस आदर्श को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।


संघ के शताब्दी वर्ष की अहमियत

विजयदशमी के इस पर्व में संघ के शताब्दी वर्ष को लेकर जो विशेष तैयारियाँ की जा रही हैं, वे संघ के योगदान को और अधिक स्पष्ट रूप से उजागर करती हैं। संघ का यह 100वां वर्ष सिर्फ एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह उन मूल्यों और आदर्शों की पहचान है, जिन पर संघ हमेशा से विश्वास करता आया है। यह वर्ष एक अवसर है, जब संघ के स्वयंसेवक न केवल अपनी भूमिका को याद करेंगे, बल्कि उन्हें और भी मजबूत करने का संकल्प लेंगे।


विजयदशमी के दिन होने वाले इस आयोजन से संघ के शताब्दी वर्ष के उद्देश्यों और उसके योगदान का सम्मान होगा। यह उत्सव समाज में एकता, सेवा, और राष्ट्रभक्ति के आदर्शों को जीवित रखने के लिए प्रेरित करेगा। पथ संचलन और बौद्धिक सत्रों के माध्यम से संघ का संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचेगा, और भारत को एक मजबूत राष्ट्र बनाने के लिए सभी मिलकर काम करेंगे।

 



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