आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की शास्त्रीपुरम हाइट्स योजना खरीदारों की कमी से जूझ रही है। इसके पीछे की वजह जानने के लिए अमर उजाला टीम ने पड़ताल की, तो हालात चौंकाने वाले दिखे। टूटा स्वीमिंग पूल, सफाई की अनदेखी, टाॅवरों से झड़ता प्लास्टर और रखरखाव की कमी है। यहां तक की शास्त्रीपुरम हाइट्स के मुख्य द्वार पर लगा बोर्ड भी टूटा हुआ है।
यहां बने फ्लैटों में से अब तक कुछ बिक सके हैं। 243 फ्लैट अब भी खाली पड़े हैं। इनकी बिक्री के लिए एडीए की बोर्ड बैठक में दाम घटाने पर मंथन किया गया। वहीं इस योजना की पड़ताल की गई, तो हालात चौंकाने वाले निकले। अरावली, केदारनाथ सहित विभिन्न टाॅवरों में सीलन की वजह से हालत खराब है। इस आवासीय योजना में टॉवरों के बीच बनाया गया स्वीमिंग पूल टूट चुका है। कार्यक्रम हाल और अंदर सीढि़यों पर सफाई का नामोनिशान नहीं है। टाॅवरों की दीवारों में भी दरारें आ गई हैं।
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शास्त्रीपुरम हाइट्स
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
क्या कहते हैं लोग
– शास्त्रीपुरम हाइट्स में में टू बीएचके फ्लैट खरीद चुके विशाल यादव का कहना है कि यहां उन्होंने तय कीमत पर फ्लैट खरीदा है। ऐसे में यदि यहां फ्लैट सस्ते हो जाते हैं, तो उनका तो एक तरह से नुकसान ही हो रहा है।
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शास्त्रीपुरम हाइट्स
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अरावली टॉवर में फ्लैट खरीद चुके ऋषभ का कहना है कि यहां की व्यवस्थाओं को सुधारने की जगह फ्लैट सस्ते करने की बात हो रही है। यदि व्यवस्थाओं को सुधार दिया जाए, तो फ्लैट इन्हीं रेट पर बिक जाएंगे।
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शास्त्रीपुरम हाइट्स
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अरावली टॉवर में रह रहे दिनेश का कहना कि सारे फ्लैट में सीलन आ रखी है। बताया कि बिजली कनेक्शन के लिए भी 250 रुपये लिए गए थे और शौचालय की कुंडी भी काम नहीं करती है। बिल्डिंगों में बंदरों का उत्पात भी है। शिकायत कई बार की, लेकिन आश्वासन ही मिला।
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शास्त्रीपुरम हाइट्स
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अब फ्लैटों को सस्ता करने की तैयारी
शास्त्रीपुरम हाइट्स में फ्लैटों की कीमत करीब 30 लाख रुपये से लेकर डेढ़ करोड़ रुपये तक तय की गई है। हालांकि, विभिन्न आवासीय योजनाओं में बिक्री बेहद कम रही है। ऐसे में बोर्ड बैठक में फ्लैटों की कीमतों को नए सिरे से आंकलन कर उन्हें सस्ता करने पर चर्चा हुई। एडीए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द बैठक कर नई दरों की रिपोर्ट तैयार करें। संभावना जताई जा रही है कि बचे हुए 243 फ्लैटों की कीमतों में कुछ कमी की जा सकती है, जिससे खरीदारों का रुझान बढ़ सके।