बाराबंकी जिले के सतरिख थाना क्षेत्र के उधवापुर स्थित कंपोजिट विद्यालय में शनिवार दोपहर सहायक अध्यापिका उमा वर्मा की आत्महत्या के मामले ने अब गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। शिक्षिका के पति की तहरीर पर रविवार शाम पुलिस ने विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सीतावती व सहायक अध्यापक सुशील वर्मा के विरुद्ध प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने की रिपोर्ट दर्ज की है।
मृतका उमा के शिक्षक पति ऋषि वर्मा ने रविवार शाम सतरिख थाने में दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि घटना वाले दिन विद्यालय पहुंचने के बाद उनकी पत्नी ने फोन पर बताया था कि प्रधानाध्यापिका और सहायक अध्यापक द्वारा उनके साथ अभद्र, अपमानजनक और धमकी भरे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि उमा बच्चों को पूरी लगन से पढ़ाती थी लेकिन यही समर्पण कुछ लोगों को खटकता था। रोज ताने मारे जाते थे कि ‘बहुत पढ़ाकू बनती हो, सरकार से अवार्ड चाहिए, बच्चों के लिए जान दे दो, फांसी लगाकर मर जाओ, हम पर कोई असर नहीं पड़ेगा।’ तहरीर में यह भी कहा गया है कि विद्यालय की प्रधानाध्यापिका और सहायक अध्यापक अक्सर देर से विद्यालय आते थे और उमा वर्मा के प्रति दुर्भावनापूर्ण व्यवहार रखते थे। उमा का जुड़ाव बच्चों से गहरा था और वह शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर समझौता नहीं करती थीं। यही बात कथित रूप से उनके लिए परेशानी का कारण बन गई।
बताया कि उमा के मार्गदर्शन दिए गए एक छात्र का राष्ट्रीय स्तर पर चयन हुआ था जिसके लिए उन्हें 11 नवंबर 2025 स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सराहना की गई थी। इसके बाद विद्यालय में तैनात प्रधानाध्यापिका और सहायक अध्यापक का व्यवहार और अधिक कटु और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला हो गया। छोटी-छोटी बातों पर छींटाकशी, तंज और धमकियां आम हो गईं। आरोप लगाया कि घटना के बाद स्टाफ भाग गया मुझे सूचना तक नहीं दी। अभिभावकों से जानकारी मिलने पर ही वह विद्यालय पहुंचे।
