सरकार, संगठन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बीच समन्वय बैठकों का दौर शनिवार को खत्म हो गया। अब इन बैठकों में उठे मुद्दे और सुझावों पर काम होगा। भाजपा की सियासी प्रयोगशाला में पहली बार माइक्रो लेबल पर आयोजित इन छह क्षेत्रीय बैठकों को लेकर सियासी गलियारों में कयासबाजी शुरू हो गई है।
बैठकों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रियता ने उपेक्षा से हताश-निराश कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद जगाई है। बैठकों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश भी की गई है कि संगठन व सरकार न केवल चुनावी तैयारियों को मिलकर आगे बढ़ाएंगे, बल्कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर कर जनता और संगठन के बीच मजबूत पुल भी बनाएंगे।
दरअसल, पंचायत चुनाव के साथ ही 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ी भाजपा और सरकार के सामने कई ऐसे मुद्दे हैं जिनका त्वरित समाधान जरूरी है। इनमें यूजीसी विवाद, ब्राह्मणों में असंतोष, कार्यकर्ताओं की नाराजगी, प्रदेश से लेकर जिला व मंडल तक संगठन में कुर्सी की मारामारी और बोर्ड, निगम व निकायों में कार्यकर्ताओं के समायोजन जैसे कई मुद्दे हैं। सभी समन्वय बैठकों में यही मुद्दे उठे। साफ है कि बैठकों में हुए मुद्देवार मंथन की छाप आगामी रणनीति में दिखेगी।
बताया जा रहा है कि बैठकों में उठे मुद्दों और समस्याओं के साथ सुझावों को भी सीएम, प्रदेश भाजपा संगठन और संघ के प्रदेश नेतृत्व के सामने रखा गया है। भाजपा और संघ में कार्यकर्ताओं की तमाम शिकायतों को दूर कर सभी मुद्दे सुलझाने की रूपरेखा तैयार करने की सहमति बनी है। सूत्रों के मुताबिक, अब प्रदेश सरकार के साथ ही भाजपा के प्रदेश संगठन में प्रस्तावित बदलावों में सबका साथ, सबका विकास का फार्मूला अपनाया जाएगा।
कोर कमेटी की बैठक में तैयार होगा रोडमैप
सूत्रों के मुताबिक क्षेत्रीय समन्वय बैठकों के बाद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कोर कमेटी की बैठक जल्द होगी। बैठक में सीएम के अलावा दोनों उपमुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, महामंत्री संगठन, क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार और राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष मौजूद रहेंगे। जल्द ही इस बैठक की तारीख तय की जाएगी। बैठक में उन सभी मुद्दों के समाधान का रोडमैप तैयार किया जाएगा जो क्षेत्रीय समन्वय बैठकों में उठाए गए हैं।
