पद्मभूषण गोपाल दास नीरज को वर्तमान और अतीत की सीमाओं में बांधकर नहीं देखा जा सकता। उनके सृजन में एक ऐसा जादुई तत्व था, जिसने हिंदुस्तान की एक साथ चार पीढ़ियों को अपने मोहपाश में बांधे रखा। मंच की दुनिया में नीरज का जादू हरिवंश राय बच्चन से भी आगे निकल गया था।

Trending Videos

4 जनवरी को पद्मभूषण गोपाल दास नीरज की जयंती है। यह विचार नीरज की आत्मकथा एक मस्त फकीर : नीरज लिखने वाले प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. प्रेम कुमार ने व्यक्त किए। अमर उजाला के साथ एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने नीरज के व्यक्तित्व और कृतित्व के अनछुए पहलुओं को साझा किया।

”नीरज” नाम ही बन गया था एक परंपरा

डॉ. प्रेम कुमार बताते हैं कि नीरज का प्रभाव इतना गहरा था कि अनगिनत लोगों ने उनसे प्रेरित होकर अपना नाम या उपनाम ”नीरज” रख लिया। कितने ही रचनाकारों ने उनके मुक्तक छंद की नकल की और उनकी विशिष्ट शैली में कविता पाठ करना शुरू किया। वे केवल एक कवि नहीं, बल्कि एक चलती-फिरती काव्य संस्था बन गए थे।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी अभी की खबरें