यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘बड़े दरबार का आदेश… कौन करे विरोध’ की कहानी। इसके अलावा ‘टेंडर का टेंशन’ और ‘…कहीं साहब फिर न आ जाएं’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…
बड़े दरबार का आदेश, कौन करे विरोध
प्रदेश में उच्चस्तर की पढ़ाई कराने वाले संस्थान इन दिनों अजीब पसोपेश में हैं। इन संस्थानों को समर्थ बनाने के लिए लागू की गई व्यवस्था, उनके लिए न निगलने वाली है न उगलने वाली। कारण, इसके लिए बड़े दरबार का आदेश है। इसके विरोध की कोई हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहा है। नौबत यहां तक आ गई है कि अब इन संस्थानों को छात्रों के विरोध का भी सामना करना पड़ता है तो वे बड़े दरबार और व्यवस्था के दिल्ली से संचालन का हवाला देकर हाथ खींच लेते हैं।
टेंडर का टेंशन
स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों टेंडर का टेंशन का चल रहा है। विभाग के मुखिया ने साफ कह दिया है कि एक बार हुए टेंडर को बार-बार नहीं बढ़ाया जाएगा। ऐसे में टेंडर करने वाली यूनिट के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है क्योंकि यह यूनिट सिर्फ विस्तार पर भरोसा करती रही है। अब नए सिरे से काम करना पड़ रहा है। ऐसे में इस यूनिट में उठापटक का दौर शुरू हो गया है।
…कहीं साहब फिर न आ जाएं
सूबे का खजाना भरने में बड़ी भूमिका निभाने वाले एक महकमे के अधिकारियों और कर्मचारियों को दिन में एक ऐसा डरावना सपना आ रहा है कि वह न सो पा रहे हैं और न जग पा रहे हैं। चर्चा है कि इस महकमे की जिम्मेदारी संभालने वाले साहब लंबे अवकाश पर जाने की तैयारी कर रही हैं। ऐसे में पुराने वाले साहब को दोबारा महकमे का चार्ज मिल सकता है। इस चर्चा से ही महकमे के लोगों के चेहरे पर पसीना आ रहा है। सभी को डर सता रहा है कि कहीं साहब की वापसी हुई तो उनके एजेंडे में नहीं आने वाले जो बचे खुचे लोग हैं, उनका सफाया हो जाएगा। तमाम लोग इस तैयारी में हैं कि अगर सपना सच साबित हुआ तो वह भी लंबे अवकाश पर चले जाएंगे।
