यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘छोटे का प्यार बड़े साहब पर भारी’ की कहानी। इसके अलावा ‘विस्तार की आहट के बीच एक दांव यह भी’ और ‘रोज लगा रहे दफ्तर के चक्कर’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…
छोटे का प्यार बड़े साहब पर भारी
खेतों को पानी देने वाले महकमे से जुड़े पूर्वांचल के छोटे चीफ साहब का एक जेई पर प्यार बड़े साहब (चीफ-1) के आदेश पर भी भारी पड़ रहा है। मामला पत्थर-पहाड़ वाले जिले से जुड़ा है। चर्चा है कि छोटे साहब ने अपने साले के लड़के को इस जिले में महकमे का मैनेजमेंट सौंप रखा है। मदद का दारोमदार इसी जेई पर है जबकि गंभीर आरोपों में जेई का यहां से तबादला हो चुका है। उसे संबद्ध कर रखा है। शिकायत मिली तो संगम नगरी वाले बड़े चीफ साहब ने 19 दिसंबर को जेई का संबद्धीकरण रद्द कर दिया, लेकिन छोटे साहब ने जेई को अभी तक कार्यमुक्त नहीं किया।
विस्तार की आहट के बीच एक दांव यह भी
मंत्रीजी की उम्र अब किनारे लग चुकी है। मंत्रिमंडल में विस्तार और बदलाव की आहट अब सत्तापक्ष क्या विपक्ष को भी सुनाई दे रही है। ऐसे में मंत्रीजी के सजातीय दो नेता उन्हें किनारे लगाने की जुगत में लग गए हैं। पश्चिम और पूरब दोनों ओर से धक्के लगाए जा रहे हैं। काफी प्रयासों के बावजूद नेताजी के खिलाफ उम्र के अलावा कोई मुद्दा नहीं मिल रहा है। मंत्रीजी की कार्यप्रणाली ऐसी है कि अपनी जाति के बाहर तो उनके विरोधी भी नहीं हैं। दोनों नेता इधर-उधर पूछ भी रहे हैं कि किस तरह से मंत्रीजी को विवादित किया जाए। अब देखते हैं कि ऊंट किस करवट बैठता है?
रोज लगा रहे दफ्तर के चक्कर
राजधानी के एक शैक्षणिक संस्थान के कर्ता-धर्ता खासे परेशान हैं। उनकी बेनामी संपत्तियों पर केंद्रीय एजेंसी लगातार कार्रवाई कर रही है। लिहाजा उन्होंने एजेंसी के कार्यालय जाने का रोज का नियम बना लिया है। घंटों तक बैठकर मनुहार भी करते हैं कि कुछ जमीनों पर रहम किया जाए। हालांकि, अधिकारी उनकी सुनने को तैयार नहीं है। दरअसल, पहले उन्होंने कई जगहों से तमाम सिफारिशें करा दीं। इनमें एक सिफारिश उल्टी पड़ गई। सुना है कि एजेंसी ने सारी जमीनों को ठिकाने लगाने का बंदोबस्त कर दिया है।
