यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘मैडम को फूल से नफरत’ की कहानी। इसके अलावा ‘लगी फटकार तो याद आई जिम्मेदारी’ और ‘साहब को खरमास खत्म होने का इंतजार’ के किस्से भी चर्चा में रहे।

मैडम को फूल से नफरत

सेहत से जुड़े महकमे की कमान संभाल रहीं मैडम को फूल से नफरत है। नए साल पर एक डॉक्टर साहब मैडम के लिए फूल लेकर पहुंचे। उन्होंने संदेशा भिजवाया। मैडम ने कमरे में बुला लिया। डॉक्टर साहब अंदर पहुंचे तो हाथ में गुलदस्ता था। फिर क्या, मैडम आगबबूला हो गईं।

उन्होंने अपने गेट पर कार्यरत कर्मी को भी बुलाकर फटकार लगाई। साफ कहा कि कोई भी फूल लेकर आए तो कह देना कि मैडम को फूलों से नफरत है। अब बेचारा कर्मी सभी को बता रहा है कि मैडम को फूल से नफरत है। शासन-सत्ता में जहां फूल की धमक है, वहीं मैडम की फूल से नफरत सुर्खियों में है।



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