यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘बड़े साहब की जेब तक पहुंची आंच’ की कहानी। इसके अलावा ‘साहब का ज्ञान लंबा, चाय तक नसीब नहीं’ और ‘स्वर्ग से आईसीआर की निगरानी’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…
बड़े साहब की जेब तक पहुंची आंच
दिल्ली से जुड़े राजस्व वाले एक महकमे में हलचल मची है। ईमानदारी के ढोल पीटने में आगे यह विभाग अक्सर प्रदेश से जुड़े महकमे की बेईमानी का राग अलापता रहता है। अब जब खुद विभाग के अफसर रंगे हाथों दबोचे गए हैं तो राजधानी तक इसकी आंच पहुंच गई है। चर्चा है कि इस पूरे मामले में राजधानी के दो बड़े अधिकारियों की भी भूमिका संदिग्ध है। यहां तक धमकी दी गई है कि अगर फंसे हुए अफसरों को बचाया नहीं गया तो वे राजफाश कर देंगे।
साहब का ज्ञान लंबा, चाय तक नसीब नहीं
प्रदेश में छात्रों के लिए तकनीकी पढ़ाई को बढ़ावा देने वाले विभाग के एक साहब चर्चा में हैं। हालत यह है कि विभाग का कामकाज भले ही नहीं दिख रहा है लेकिन साहब की बैठकें नियमित हैं। अब विभाग के अधिकारी इसलिए भी परेशान हैं कि साहब 10-15 मिनट की बैठक भी दो घंटे खींचकर पूरा ज्ञान देते हैं लेकिन चाय, पानी तक नहीं पूछते हैं। कई बार तो अधिकारी बैठक के बीच से उठकर चाय, नाश्ता करने चले जाते हैं। वापस लौटकर फिर बैठक में जुड़ जाते हैं। चर्चा तो यह भी है कि साहब का विभाग में मन नहीं लग रहा लेकिन उनको मुक्ति नहीं मिल रही है।
स्वर्ग से आईसीआर की निगरानी
आईसीआर की निगरानी के लिए पिछले दिनों विपक्षी दल ने निगरानी करने वालों की सूची जारी की। इस सूची में स्वर्ग सिधार चुके नेताओं के भी नाम हैं। कुछ ऐसे नेता भी हैं जो अस्पताल के बेड पर हैं तो कुछ दूसरे दलों का दामन थाम चुके हैं। सूची अनुमोदित होकर जिलों में भेज दी गई। यह देख पार्टी के ही नेता कानाफूसी करने लगे। पिछले दिनों हुई बैठक में भी यह मसला उठा लेकिन पार्टी के कर्ताधर्ता को इससे फर्क नहीं पड़ता है। उनका सीधा सा जवाब है कि सूची बदल दी गई है। जब पार्टी में कम लोग हैं तो जाहिर है कि छोटी-छोटी गलतियां होती रहेंगी।
