बचाएं या निपटाएं.. बनी गले की फांस
इस्तीफे का विशुद्ध राजनीतिकरण होने के बाद न केवल राजस्व वाले विभाग बल्कि पूरे सरकारी महकमे में चखचख मची है। इस मामले में खुलकर धड़ेबंदी हो गई है। एक पक्ष कह रहा है कि जब मीडिया में इस्तीफे की घोषणा को सरकारी सेवा नियमों का उल्लंघन बताकर एक अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया तो दूसरे को क्यों खुल्ला छोड़ दिया गया। सरकारी महकमों के गलियारों में ये भी हवा खूब चल रही है कि दूसरे की मान मनौव्वल करने के लिए दो वरिष्ठ अधिकारी खुद चलकर घर पहुंचे। बहरहाल इतना तय है कि ये मामला केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गया है।
एआई भी नहीं पढ़ पाएगा बड़े वीसी का दिमाग
प्रदेश में इस समय राज्य विश्वविद्यालयों का जमावड़ा है। जमावड़ा अत्याधुनिक तकनीकी और मुद्दों से जुड़ा है तो यह ज्यादा गंभीर हो जाता है। किंतु गुरु जी तो गुरु जी हैं, कहीं भी अवसर तलाश लेते हैं। मंच पर एक राष्ट्रीय संस्थान के विशेषज्ञ ने एक कुलपति के दिमाग की चर्चा उदाहरण के रूप में दी तो पीछे बैठे गुरु जी ने चुटकी ली। कहा कि बड़े कुलपति के दिमाग को कई एआई टूल भी नहीं पढ़ पाएंगे। सभी इस पर काफी देर तक मुस्कुराते रह गए।
कलरफुल नेताजी की अफवाह
कलरफुल नेताजी अफवाह फैलवा रहे हैं कि वह पाला बदलने की फिराक में हैं। उनके लोगों ने विपक्ष के कुछ नेताओं से संपर्क भी किया है। मामला जब भैयाजी तक पहुंचा तो उन्होंने ऐसी डांट लगाई कि पैरवी करने वाले विपक्ष के नेता बगलें झांकने लगे। भैयाजी ने समझाया कि कलरफुल नेताजी के पैंतरों को वह अच्छी तरह समझते हैं। वह इधर आना नहीं चाहते बल्कि पाला बदलने की अफवाह फैलाकर जहां हैं वहां सौदेबाजी क्षमता बढ़ाना चाहते हैं। इसलिए क्षमता बढ़ाने का यह मौका कलरफुल नेताजी को तो वह देने से रहे।
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