यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘कुर्सी बचाने और पाने की होड़’ की कहानी। इसके अलावा ‘डाटा की सेंधमारी’ और ‘साहब ने मैनेज कर दी जांच’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी… 

कुर्सी बचाने और पाने की होड़

सूबे में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा जोरों पर है। ऐसे में कई माननीयों के बीच कुर्सी बचाने और पाने की होड़ मची है। खासकर दो माननीयों में यह होड़ कुछ ज्यादा ही है। इसका ताजा नमूना यूपी दिवस के उद्घाटन कार्यक्रम में दिखा। चूंकि कार्यक्रम में दिल्ली में सूची फाइनल करने वाले माननीय मुख्य अतिथि के तौर पर पधारे थे, इसलिए दोनों माननीयों ने अपने-अपने तरीके से सक्रियता दिखाई। यह कार्यक्रम भले ही पर्यटन विभाग का था लेकिन कुर्सी पाने की दौड़ में शामिल एक माननीय मंच पर इस कदर सक्रिय थे, मानो मुख्य अतिथि उनसे ही फीडबैक लेने वाले हैं। माननीय पहले कुर्सीधारी रह चुके हैं। वहीं, कुर्सी जाने की चर्चाओं से घिरे दूसरे माननीय कार्यक्रम में नहीं थे लेकिन रास्ते में सबसे अधिक होर्डिंग्स और पोस्टर लगाकर अपनी सक्रियता साबित करने में जुटे रहे।

डाटा की सेंधमारी

विपक्ष के भैयाजी डाटा लीक रोकने की फूलप्रूफ व्यवस्था कर रहे हैं। दरअसल, पिछले चुनावों में सत्तापक्ष ने उनकी पार्टी के डाटा में सेंधमारी कर ली थी। इधर, कोई काम हो, किसी को पैसा दिया जाए या किसी से चंदा लिया जाए, पूरी की पूरी सूची सत्ता पक्ष के पास रियल टाइम में पहुंच रही थी। इससे सबक लेते हुए भैयाजी ने डाटा लीक होने से बचाने के लिए चार लेयर की सिक्योरिटी तैयार की है। किसी भी नेता, पदाधिकारी या कर्मचारी की जरा सी भी संदिग्ध गतिविधि मिलने पर उसे सबसे बाहरी चौथी लेयर पर ही रोका जा रहा है।

साहब ने मैनेज कर दी जांच

चर्चित कफ सिरप कांड की आंच कारागार तक पहुंची थी। वहां का एक कर्मचारी गिरोह का कारखास था, जिसे निलंबित कर दिया गया था। अब आगे की कार्रवाई होनी थी लेकिन सिरप का असर ही कुछ ऐसा है कि समय के साथ साथ सब शांत हो गया। साहब ने जांच ही मैनेज कर दी। न जांच होगी और न उस कारखास को कोई सजा भुगतनी पड़ेगी।



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