यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में विभाग से एक साहब की विदाई हुई तो एक गुट उन पर पलटवार की तैयारी में जुटा है। आखिर क्या है ‘थैली तौलने वाले साहब’ का किस्सा। साथ ही एक और कहानी जो यह बताएगी कि आखिर सिस्टम काम कैसे करता है? आगे पढ़ें, नई कानाफूसी… 

अब पलटवार की तैयारी

सरकारी खजाने को भरने में अव्वल एक विभाग से साहब की विदाई क्या हुई, एक गुट पलटवार की तैयारी में जुट गया है। साहब के फैसलों से संकट में घिरे कुछ अफसरों की तो जैसे पौ बारह हो गई है। अपने खिलाफ किसी संभावित कार्रवाई से बचने के लिए पहले ही ऐसी फाइल मजबूत करने में जुटे हैं जो साहब को परेशानी में डाल सके। दिलचस्प यह है कि इसका पहले ही अहसास हो गया था कि साहब की विदाई जल्द होने जा रही है। इसीलिए इस गुट ने उनके खिलाफ सीट पर रहते अघोषित मोर्चा खोलने का एलान कर दिया था।

थैली तौलने वाले साहब

गाड़ी-घोड़ा से जुड़े विभाग में एक ऐसे व्यक्ति की तलाश थी, जिसे थैली तौलने की कला में महारत हासिल हो। इसके लिए कई लोगों ने दावेदारी पेश की, लेकिन सब नाकारा निकले। फिर दूसरे विभाग में कार्यरत कार्मिक को ज्यादा मानदेय देकर इस विभाग में बुलाया गया। अब वह पहले की तरह थैली तौलने की कला दिखा रहा है। उसकी इस कला को देखते हुए विभाग के पुराने दिग्गजों ने इस कर्मी का नाम थैली तौलने वाला साहब रख दिया है। अब देखना यह है कि यह साहब पहले की तरह यहां करिश्मा दिखा पाते हैं या नहीं।

साहब के अपने भी हो गए बेगाने

प्रदेश के पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग के एक मुखिया आज-कल अपने ही विभाग में बेगाने हो गए हैं। हालांकि, इसका कारण भी वह खुद ही हैं। कुछ ज्यादा ही कड़वा बोलने वाले साहब एक समय विभाग के लोगों के लिए काफी सहयोगी माने जाते थे लेकिन जबसे वह विभाग के मुखिया की कुर्सी पर बैठे हैं, उनकी बोलचाल और कामकाज का तरीका बदल गया है। आए दिन वह किसी न किसी से कड़वा बोलते हैं। वह अपने खास लोगों को भी बेगाना बना चुके हैं। ऐसे में उनके लिए विभाग में हालात काफी दिक्कत भरे होने लगे हैं।



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