महिलाओं की तरह पुरुषों में स्तन कैंसर का खतरा भले ही कम हो, लेकिन दोनों ही मामलों में यह बराबर घातक है। लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई ने 10 वर्ष के दौरान आए मामलों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है। इसके साथ ही पुरुषों को भी स्तन कैंसर के प्रति जागरूक रहने का सुझाव दिया गया है।
यह अध्ययन वर्ष 2014 से 2024 के बीच संस्थान में आए पुरुषों के स्तन कैंसर के 42 मामलों पर किया गया। इसमें देखा गया कि 25 को दाएं और 19 को बाएं स्तन में कैंसर था। इसमें सात फीसदी पुरुष पहले, 60 फीसदी दूसरे, 21 फीसदी तीसरी और 12 फीसदी चौथी स्टेज में इलाज के लिए आए थे।
बीमारी की स्टेज के हिसाब से जब जीवित रहने के महीनों का आकलन किया गया तो पहली स्टेज वाले मरीजों तक पहुंच नहीं रखी जा सकी। दूसरी स्टेज वाले रोगी औसतन 81 महीने, तीसरी स्टेज वाले 77 महीने और चौथी स्टेज वाले औसतन 29 महीने ही जीवित रहे। अध्ययन कर्ताओं के अनुसार, महिलाओं में भी स्तन कैंसर के बाद बीमारी की स्टेज बढ़ने के साथ खतरा भी बढ़ता जाता है। इसी तरह पुरुषों को भी स्तन कैंसर के मामले में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
अध्ययन में ये लोग रहे शामिल
डॉ. अलाउद्दीन अंसारी, डॉ. पुनीता लाल, डॉ. शगुन मिश्रा, डॉ. नितिन कुमार, डॉ. गौरव अग्रवाल, डॉ. अंजली मिश्रा, डॉ. ज्ञान चन्द, डॉ. सबरत्नम एम।
पुरुषों में स्तन कैंसर की वजह
ज्यादा उम्र के साथ ही आनुवांशिक कारणों से भी पुरुषों को स्तन कैंसर हो सकता है। पुरुषों में एस्ट्रोजन हार्मोन का उच्च स्तर भी इसका कारण बनता है।
सौ मामलों में एक मरीज पुरुष
अध्ययन के अनुसार, पुरुषों में होने वाले सभी प्रकार के कैंसर के मामलों में से एक फीसदी हिस्सा स्तन कैंसर का है। इसी तरह स्तन कैंसर के हर सौ में से एक मामला पुरुष स्तन कैंसर का होता है।
पुरुषों में स्तन कैंसर के लक्षण
- स्तन में निप्पल के नीचे सख्त दर्द रहित गांठ।
- निप्पल से रिसाव या निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना।
- लालिमा वाले क्षेत्र पर लालिमा या पपड़ी।
- स्तन की त्वचा पर गड्ढे पड़ना या सिकुड़ना।
