देश की सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए सक्रिय संस्था स्पिक मैके (SPIC MACAY – Society for the Promotion of Indian Classical Music And Culture Amongst Youth) इस बार भी Muzaffarnagar के स्कूलों में सांस्कृतिक गतिविधियों की अलख जगाने को तैयार है। आगामी 9 दिसंबर से जिले के 10 प्रतिष्ठित विद्यालयों में भरतनाट्यम पर आधारित कार्यशाला और प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इस पहल में प्रमुख भूमिका निभाने वाली हैं भारत की प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना डॉ. मंदाक्रांता रॉय, जिन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ. मंदाक्रांता रॉय, जो त्रिपुरा में जन्मी और कोलकाता में पली-बढ़ी हैं, अपनी अनूठी शैली और भारतीय शास्त्रीय नृत्य में गहराई के लिए जानी जाती हैं। वे इन कार्यशालाओं के माध्यम से छात्रों को न केवल भरतनाट्यम की बारीकियां सिखाएंगी, बल्कि उन्हें भारत की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत अनुभव भी कराएंगी।


कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी:

इस सांस्कृतिक श्रृंखला का आयोजन जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) राजेश श्रीवास की प्रेरणा से किया गया है। कार्यशाला का शुभारंभ 9 दिसंबर को होगा। प्रत्येक दिन दो विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

  • 9 दिसंबर, 2024:
    • सुबह 10 बजे: वैदिक पुत्री पाठशाला
    • दोपहर 1 बजे: ग्रेन चौम्बर इंटर कॉलेज
  • 10 दिसंबर, 2024:
    • डी.ए.वी. इंटर कॉलेज
    • एस.डी. इंटर कॉलेज
  • 11 दिसंबर, 2024:
    • एस.डी. कन्या इंटर कॉलेज (झांसी की रानी मार्ग)
    • चौधरी छोटूराम इंटर कॉलेज
  • 12 दिसंबर, 2024:
    • जैन कॉलेज, प्रेमपुरी
    • नगरपालिका इंटर कॉलेज
  • 13 दिसंबर, 2024:
    • एस.डी. कन्या इंटर कॉलेज (गांधी कॉलोनी)
    • एम.एम. इंटर कॉलेज

भरतनाट्यम की महिमा:

भरतनाट्यम, भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्राचीनतम विधाओं में से एक है, जिसमें मुद्राएं, भाव-भंगिमाएं, और अभिव्यक्ति प्रमुख भूमिका निभाती हैं। इस नृत्य शैली के जरिए न केवल कला को प्रस्तुत किया जाता है, बल्कि यह एक योग और ध्यान का माध्यम भी है। डॉ. मंदाक्रांता रॉय जैसे नर्तकों द्वारा यह नृत्य और भी प्रभावशाली हो जाता है।

कार्यशाला के दौरान, विद्यार्थियों को भरतनाट्यम की मूलभूत तकनीक जैसे आदावु, हस्त मुद्रा, और नाट्यशास्त्र के सिद्धांतों की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा, वे इस नृत्य के माध्यम से भारतीय पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक कहानियों को मंच पर प्रस्तुत करना भी सीखेंगे।


डॉ. मंदाक्रांता रॉय की यात्रा:

डॉ. मंदाक्रांता रॉय ने त्रिपुरा से अपनी कला यात्रा की शुरुआत की और कोलकाता के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने नृत्य में पीएचडी की उपाधि हासिल की और कई राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। उनकी खासियत है भरतनाट्यम के पारंपरिक और समकालीन रूपों का समन्वय।


स्पिक मैके की भूमिका:

स्पिक मैके, जो पिछले चार दशकों से भारतीय संस्कृति को युवाओं तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है, का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कलाओं के प्रति जागरूकता और रुचि उत्पन्न करना है। संस्था के संस्थापक, डॉ. किरण सेठ, ने 1977 में इसकी शुरुआत की थी। आज यह संस्था 500 से अधिक शहरों और 50 देशों में अपनी गतिविधियां चला रही है।

स्पिक मैके के प्रयासों से लाखों विद्यार्थी भारतीय संस्कृति के अमूल्य खजाने से परिचित हुए हैं। मुजफ्फरनगर में इस तरह का आयोजन यहां के छात्रों के लिए बड़ा अवसर है।


विद्यार्थियों और शिक्षकों में उत्साह:

इन कार्यशालाओं को लेकर विद्यार्थियों और शिक्षकों में उत्साह है। डीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य ने कहा, “स्पिक मैके का यह प्रयास विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में सहायक होगा। भरतनाट्यम जैसे नृत्य बच्चों में अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।”


सांस्कृतिक पुनर्जागरण की ओर कदम:

इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को भारत की सांस्कृतिक विविधता और उसकी गहराई से जोड़ना है। भरतनाट्यम जैसे नृत्य न केवल एक कला रूप हैं, बल्कि भारतीय दर्शन, योग, और आध्यात्मिकता का प्रतिबिंब भी हैं।

मुजफ्फरनगर के विद्यालयों में इस तरह के आयोजन एक नई परंपरा की शुरुआत कर सकते हैं। यह बच्चों को उनके नियमित पाठ्यक्रम से अलग हटकर कुछ नया सीखने और आत्म-अभिव्यक्ति के अवसर प्रदान करेगा।


यह श्रृंखला न केवल बच्चों को नृत्य की शिक्षा देगी, बल्कि उन्हें भारतीय कला और संस्कृति का सम्मान करना भी सिखाएगी। 9 दिसंबर से शुरू हो रही इस यात्रा में शामिल हर छात्र एक अनमोल अनुभव प्राप्त करेगा।



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