मंगलवार को शाम 7:30 बजे तक पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी की मौत की खबर आम हो गई। इसके बाद तो उनके आवास तिवारी हाता की ओर जाने वाले रास्ते पर गाड़ियों की लंबी कतार देखी गई। शहर में सबकी जुबां पर एक ही सवाल था कि क्या सच में तिवारी जी नहीं रहे?
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वॉकर से पहुंचे राम समुझ शुक्ला कहते हैं कि बाबू साइकिल से हरिशंकर को लेकर मैं एयरफोर्स के पास जाता था। पहला ठेका उन्हें तब वहीं का मिला था। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि न कोई दोस्त था, न कोई दुश्मन। सबको एक नजर से देखते थे। सही के साथ खड़ा रहने की उनकी अलग ही क्षमता थी। यही वजह है कि उन्हें लोग प्यार करते थे। आखिरी बार दो महीने पहले मिलने पहुंचा था, लेकिन उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, इस वजह से मिल नहीं पाया।
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