इटावा। शहर में स्थित इस्लामिया इंटर कॉलेज में इटावा हिंदी सेवा निधि का 31वां सारस्वत समारोह का आयोजन किया गया। इसमें हिंदी ताकत को बताते हुए इसे अन्य भाषाओं को हजम करने वाली भाषा बताया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज मित्तल ने द्वीप प्रज्जवलित कर किया। वर्ष 1993 में न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्त ने हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के मकसद से इटावा हिंदी सेवा निधि की स्थापना की थी। संस्था लगातार हिंदी से जुड़े साहित्यकारों, फिल्म निर्माताओं और अन्य लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक वर्ष समारोह का आयोजन किया जाता है। रविवार को 31वें समारोह कार्यक्रम में पहुंचे। कई न्यायमूर्तियों, साहित्यकार, अधिवक्ता और समाजसेवियों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति पंकज मित्तल ने कहा कि उन्हें हिंदी से प्रेम करना न्यायमूर्ति प्रेमशंकर ने ही सिखाया था।
उन्होंने कहा कि हमें हिंदी को किसी भी क्षेत्र में कमजोर नहीं समझना चाहिए। हमें अंग्रेजी के शब्द गुड मार्निंग और गुड नाइट को त्याग देनी होगी। इस प्रकार सरकार ने नोटबंदी का निर्णय लिया। उसी प्रकार हिंदी के लिए सरकार को अच्छे कदम उठाने चाहिए। कहा कि हिंदी को हमें देश ही नहीं पूरे विश्व की भाषा बनानी है। इस बीच पुष्प की अभिलाषा है हिंदी, भारत माता की गले की हार है… हिंदी कविता सुनाकर समारोह को हिंदीमय बना दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रयागराज हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के न्यायमूर्ति एआर मसूदी ने कहा कि एक अधिवक्ता पीड़ित के सहारे की लाठी होता है उसी अनुरूप उसे कार्य करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि दिवंगत प्रेमशंकर हमेशा न्यायिक कार्य में हमेशा हल्का भोजन करने की बात कहते थे। आज अंग्रेजी ने करोड़ों लोगों को अपने में जकड़ लिया है। अगर हम सब लोग मध्यस्थता का माध्यम अपना लें तो काफी हद तक अंग्रेजी रूपी बीमारी से लड़ाई लड़ सकते है। हमें हिंदी को मजबूती प्रदान करने के लिए पहले संस्कृत को बल देना होगा। कहा कि वह हिंदी के लिए कर्मयोगी का काम कर रहे है हालांकि उन्हें हिंदी लिखनी नहीं आती लेकिन पढ और समझ लेते है। सभी लोगों को – मैं जानूंगा हिंदी तुम भी जानोगे हिंदी का मार्ग अपनाना होगा। कहा कि इटावा के उर्दू मोहल्ला में हिंदी पल रही है यह हमारे लिए गर्व की बात है।
न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा कि वह 2014 से लगातार इस कार्यक्रम से जुड़े है। अंग्रेजों को भगा दिया लेकिन उनकी अंग्रेजियत नहीं गई। ऐसे स्कूलों में बच्चों को न पढ़ाए जहां हिंदी का स्थान न हो। न्यायमूर्ति राजीव ने कहा कि दिन ब दिन हिंदी तरक्की की ओर बढ़ रही है। एडवोकेट इंद्रभूषण सिंह ने कहा कि हिंदी की पाचन शक्ति बहुत है। वह विश्व की किसी भी भाषा को हजम कर लेगी। प्रदीप गुप्ता ने कहा कि उन्होंने अंग्रेजी में लिखे निमंत्रण पत्रों के कार्यक्रमों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। इस दौरान दस से अधिक लोगों को सम्मानित किया गया वहीं कई पुस्तकों का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन सह-संयोजक डॉ. कुश चतुर्वेदी ने किया। इस दौरान न्यायमूर्ति अशोक कुमार ,डीएम अवनीश राय , एसएसपी संजय कुमार वर्मा, एडीएम अभिनव रंजन श्रीवास्तव, मुख्य न्यासी प्रदीप कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार, संयोजक राजकुमार, जमुनादास अग्रवाल, डॉ. विद्याकांत तिवारी मौजूद रहे।
