– 14 साल पुराने मामले में न्यायालय ने सुनाया फैसला

अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम न्यायालय के विशेष न्यायाधीश शक्तिपुत्र तोमर की अदालत ने गैर इरादतन हत्या के मामले में तीन अभियुक्तों को 10-10 साल के कारावास की सजा सुनाई। अभियुक्तों ने शराब के लिए पैसे न देने पर 14 साल पहले वारदात को अंजाम दिया था।

विशेष लोक अभियोजक केशवेंद्र प्रताप सिंह और कपिल करौलिया ने बताया कि राजगढ़ निवासी अशोक अहिरवार ने प्रेमनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें बताया था कि उसका छोटा भाई रविंद्र अहिरवार (40) पुताई का काम करता था। 20 फरवरी 2010 को वह साइकिल से मजदूरी के लिए बल्लमपुर गांव गया था। लेकिन, वापस लौटकर नहीं आया। इस पर उसकी तलाश शुरू कर दी, लेकिन पता नहीं चला। अगले दिन 21 फरवरी 2010 को ग्रामीणों ने बताया कि एक व्यक्ति की लाश बल्लमपुर रोड पर गोदाम के पास मिली है। इस पर बिजौली चौकी गया तो वहां पुलिस ने लाश दिखाई जो रविंद्र अहिरवार की थी। पुलिस जांच में सामने आया कि 20 फरवरी 2010 को बल्लमपुर रोड पर गोदाम के पास रविंद्र अहिरवार को राजगढ़ निवासी प्रेम कुमार प्रजापति, नंदू अहिरवार और जनमेश अहिरवार मिले और तीनों शराब के लिए पैसे मांगने लगे। रविंद्र ने पैसे देने से मना कर दिया। इस पर तीनों ने चाकू और पत्थर मारकर रविंद्र अहिरवार की हत्या कर दी थी। बाद में पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया था। न्यायालय ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद तीनों अभियुक्तों को 10-10 साल के कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया, जिसकी अदायगी न करने पर अभियुक्तों को दो-दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा न्यायालय ने अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई।



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