
प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : डेमो
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आवास विकास परिषद ने दिव्यांग रिटायर्ड कर्नल को आवंटित आवास का कब्जा देने में 28 महीने की देरी कर दी। साथ ही विभिन्न मदों में 4.77 लाख रुपये अलग से ले लिए। इस पर उन्होंने राज्य उपभोक्ता आयोग की शरण ली। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने आवास विकास पर भारी हर्जाना लगाते हुए कर्नल को विभिन्न मदों में ब्याज व आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में 22.5 लाख रुपये देने का आदेश दिया है।
84 वर्षीय रिटायर्ड कर्नल अशोक कुमार ने आयोग में अपील करते हुए बताया था कि उन्होंने अक्तूबर 2012 में आवास विकास की वृंदावन योजना में नीलगिरि एन्क्लेव में फ्लैट के लिए आवेदन किया था। उन्हें फ्लैट आवंटित किया गया, जिसकी कीमत 20.88 लाख रुपये थी। उन्होंने नियमानुसार किस्त जमा की। दो साल में फ्लैट पर कब्जा देने का वादा किया गया, पर इसमें ढाई साल का विलंब कर दिया और तय कीमत के अलावा 4.76 लाख रुपये अतिरिक्त जमा कराए गए। इसमें फ्लैट रेट चेंज चार्ज, एडिशनल कॉस्ट, सर्विस टैक्स, जीएसटी, वेलफेयर मेंटेनेंस टैक्स आदि शामिल था।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने आदेश दिया कि वादी की ओर से जमा कराए 4.76 लाख रुपये वर्ष 2017 से 12 फीसदी ब्याज के साथ आवास विकास एक महीने में वापस करे। सेना के वरिष्ठ अधिकारी, वरिष्ठ नागरिक और दिव्यांगता को देखते हुए उनके जमा कराए 20.88 लाख पर 28 महीने का 12 फीसदी ब्याज भी देना होगा। मानसिक कष्ट के एवज में पांच लाख रुपये भी देने होंगे।
इसके अलावा कर्नल पांच साल किराये के मकान में रहे। इसका पांच हजार रुपये महीने किराये के हिसाब से तीन लाख का भुगतान भी आवास विकास करेगा। परिवाद व्यय के 50 हजार रुपये देने होंगे। पूरी रकम करीब 22.50 लाख रुपये है।
