संवाद न्यूज एजेंसी

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झांसी। क्षेत्रीय वन कार्यालय चिरगांव से सटे खेत में बिना अनुमति के ही जून में सागौन के 30 पेड़ों को काटा गया था। कटान की सूचना मिलने पर वन कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर कटे हुए पेड़ों की सूची तैयार की। दो माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पेड़ काटने वाले पर कार्रवाई नहीं की गई है। शिकायत मिलते ही विभागीय अधिकारियों ने जांच टीम का गठन कर दिया है।

चिरगांव रेंज से सटे देवी सिंह के खेत में सागौन के पेड़ लगे हुए थे। खेत स्वामी की ओर से पेड़ों को काटकर जमीन समतल किया जा रहा था। सूचना मिलते ही वनकर्मी मौके पर पहुंचे और जांच की। विभागीय सूची के मुताबिक, सागौन के 30 पेड़ों को काटा गया था। घटना के दो माह बीत जाने के बाद भी वन विभाग की ओर से आरोपियों पर केस दर्ज नहीं किया गया। इसके साथ ही जुर्माने की धनराशि वसूल नहीं की गई है। कटे हुए सागौन के पेड़ों की कीमत डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई है। प्रभागीय वन अधिकारी जेबी शेंडे ने बताया कि मामला संज्ञान में आने पर उप प्रभागीय वन अधिकारी विनोद यादव की अध्यक्षता में टीम का गठन कर दिया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगाी।

यह है सागौन का पेड़ काटने का नियम

सागौन का पेड़ काटने के लिए प्रभागीय वन अधिकारी को पेड़ की फोटो लगाकर आवेदन करना पड़ता है। आवेदन क्षेत्रीय वन कार्यालय में भेजा जाता है। जांच के बाद पांच से कम पेड़ काटने की अनुमति प्रदान की जाती है। इसके साथ ही पेड़ काटने वाले को एक हजार रुपये प्रति पेड़ के हिसाब से डाकघर में एनएससी के माध्यम से धनराशि जमा करनी पड़ती है। वहीं, सौ रुपये पातन शुल्क और 10 रुपये आवेदन रसीद के लिए जमा करना पड़ता है। पेड़ काटने के एवज में नए पेड़ लगाकर देखरेख करने का नियम है।



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