उरई। लंबे विवाद और टेंडर निरस्तीकरण की खींचतान थमने के बाद नगर पालिका अब विकास कार्यों की पटरी पर लौटती दिखाई दे रही है। करीब एक सप्ताह तक टेंडरों को लेकर उठे विवाद ने न सिर्फ शासन तक हलचल मचाई, बल्कि कई दिनों तक सारे विकास कार्य ठप हो गए थे।

अब स्थिति सामान्य होने पर शुक्रवार को पूरे दिन टेंडर दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई, ताकि इस बार किसी तरह की अनियमितता का आरोप न लगे। देर रात तक पालिका कर्मचारी और जेई दस्तावेजों की पड़ताल में जुटे रहे। दो सप्ताह पहले शुरू हुआ टेंडर विवाद काफी तूल पकड़ चुका था। फरवरी 2025 की कार्ययोजना के तहत 25 जुलाई को जारी टेंडर की तिथि पहले 6 अगस्त तक और फिर 11 अगस्त तक बढ़ाई गई थी।

आरोप लगे कि कुछ निजी स्वार्थ पूरे न होने पर तिथि और आगे बढ़ाने की योजना थी, जिससे विकास कार्य अधर में लटक गए। 28 जुलाई को ऑफलाइन टेंडर भी जारी किए गए थे, लेकिन उन्हें 10 अगस्त तक खोला ही नहीं गया। इसके विरोध में ठेकेदारों ने ज्ञापन सौंपकर 15वें वित्त और दो प्रतिशत श्रेणी के टेंडरों की तिथि बढ़ाने की मांग की।

हालात तब और बिगड़े जब 11 अगस्त को अचानक टेंडर निरस्त कर दिए गए। इस पर स्थानीय विधायक ने डीएम को पत्र भेजकर पालिका पर अनियमितताओं और निजी लाभ के आरोप लगाए। मामला इतना बढ़ा कि डीएम ने जांच कमेटी गठित कर दी। इसके बाद 29 जनवरी 2025 को स्वीकृत कार्ययोजना के तहत 9 अप्रैल को जारी टेंडरों में केवल 13 कार्यों के निरस्तीकरण पर भी सवाल उठे।

भाजपा के चार सभासद विपिन, ज्योति, आरती पुष्पेंद्र और पुष्पा देवी ने प्रमुख सचिव को शिकायत पत्र सौंपा और पालिका प्रशासन पर मनमानी के गंभीर आरोप लगाए थे। लगातार विवादों से घिरी पालिका अब किसी तरह विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को टेंडर दस्तावेजों की गहन जांच की गई। शनिवार को 6.95 करोड़ रुपये के टेंडर खोले जाएंगे। इसमें वार्डों की 32 सड़कों के निर्माण के साथ दो आठ-सीटर शौचालय भी बनाए जाएंगे। पहला कोंच बस स्टैंड पर और दूसरा शहीद स्मारक मरघट के सामने।

पालिका ईओ राम अचल कुरील ने बताया कि शहर के विकास को गति देने के लिए नए प्रस्ताव लगातार तैयार हो रहे हैं। वहीं, पालिकाध्यक्ष गिरजा चौधरी ने कहा कि पालिका के अंदरूनी विवाद खत्म हो गए हैं और अब सभी मिलकर शहर के विकास के लिए काम कर रहे हैं।



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