– टेरर फंडिंग का डर दिखाकर बुजुर्ग कर्मी से वसूली रकम, साइबर थाने में पहुंचकर दर्ज कराई प्राथमिकी

अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। सीपरी बाजार के प्रेमगंज मोहल्ला निवासी सेवानिवृत्त रेलकर्मी लक्ष्मण प्रसाद पटैरिया एवं उनकी पत्नी को साइबर जालसाजों ने टेरर फंडिंग में शामिल होने का डर दिखाकर ग्यारह दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा और उनसे 41.50 लाख रुपये वसूल लिए। सीबीआई एवं एनआईए का अफसर बनकर घंटों उनसे पूछताछ की। लाखों रुपये ऐंठने के बाद भी उनको धमकाकर पैसों की मांग कर रहे थे। बुजुर्ग ने परेशान होकर यह बात अपने बेटे को बताई, तब जाकर मामला खुला। इसके बाद उन्होंने साइबर थाने में झांसी निवासी चार आरोपियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

प्रेमगंज निवासी लक्ष्मण प्रसाद पटैरिया ने पुलिस को बताया कि वह पत्नी के साथ अकेले रहते हैं। 15 दिसंबर को उनके मोबाइल पर अज्ञात नंबर से कॉल आई। आरोपी ने खुद को एनआईए का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनकी आधार कार्ड की एक प्रति आतंकवादियों के पास मिली है। उनके नाम का सिम भी उपयोग में लिया जा रहा है। उनसे राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की बात कही। यह सुनकर दंपती घबरा उठे। जांच के लिए उन लोगों ने एक अधिकारी को झांसी में उनके घर भेजने की बात कही। तब तक किसी से संपर्क न रखने को कहा। उनको डराने के लिए अधिकारी का फर्जी रिफ्रेंस नंबर एमएच-6521 एवं नंबर 21297 भी बताया। इसके बाद फोन कॉल में चार अन्य लोग भी शामिल हो गए। उन लोगों ने सेना एवं पुलिस की वर्दी पहन रखी थी। उनमें से एक ने खुद को विजय खन्ना, सीबीआई अधिकारी संदीप रावत एवं निगरानी अधिकारी सुनील यादव बताया।

जांच पूरी न होने तक दंपती को किसी से भी बात न करने के लिए धमकाया। उनकी डिटिजल निगरानी रखी जा रही है। बात न मानने पर कार्रवाई होगी। जालसाजों ने यह भी धमकी दी कि पूरे मामले की निगरानी एसएसपी एवं डीसीपी रैंक के अफसर कर रहे हैं। दूसरे दिन खुद को डीसीपी बताने वाला महेंद्र पंडित नामक जालसाज घर पहुंचा। उसने भी उनको धमकाया। उसने एक पत्र दिखाया। उनकी बातों को सुनकर दंपती दबाव में आ गए। धमकाने पर उन्होंने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा पहुंचकर अपने खाते से जालसाजों के पांच अलग-अलग खातों में 41.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। लक्ष्मण प्रसाद का कहना है कि इसके बाद भी जालसाज अब रोजाना फोन करके उसे धमका रहे थे। उनकी तहरीर पर साइबर पुलिस ने रोेहित कुमार, विजय खन्ना, संदीप रावत एवं सुनील यादव के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करके उनकी तलाश में जुट गई है।

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शिकायत मिलने के बाद पुलिस जांच में जुटी है। जिन बैंक खातों में पैसा भेजा गया, उसका पता लगाया जा रहा है। खाते से भेजे गए पांच लाख रुपये होल्ड करा दिए गए हैं। नौ लाख रुपये भी किस बैंक खाते में गए इसका पता चल चुका है। अन्य बिंदुओं की भी जांच हो रही है।

पीयूष पांडेय, सीओ साइबर पुलिस

बचाव के लिए यह उपाय करें

साइबर विशेषज्ञ डाॅ. राजीव त्रिपाठी के मुताबिक कई माध्यमों से यह बात हमेशा बताई जाती है कि कोई भी एजेंसी किसी को डिटिजल अरेस्ट नहीं करती। कोई व्यक्ति अगर इस बहाने से पैसा मांगता है, तब तुरंत सावधान होने की जरूरत है। परिवार से चर्चा करनी चाहिए।

– फोन पर इस तरह की अनजान कॉल आने पर सबसे पहले परिजनों से बात करें

– तुरंत नजदीक के पुलिस थाने में जाकर मदद मांगनी चाहिए

– पैसों को लेनदेन कभी भी अकेले न करें

– परिवार के बुजुर्ग लोगों को ध्यान रखें। अक्सर डिजिटल अरेस्ट जैसी वारदात बुजुर्गों के साथ की जाती है।

– साइबर जालसाजी की पता चलने पर तुरंत 1930 में शिकायत दर्ज कराएं



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