confessed to crime after seven years and settled case by paying fine of hundred rupees

राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान मौज़ूद न्यायाधीश
– फोटो : अमर उजाला

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उत्तर प्रदेश के एटा में राजा का रामपुर थाना क्षेत्र के खैरपुरा गांव निवासी सत्यभान सिंह को अब भारतीय स्टेट बैंक का ऋण चुकाने लिए किए जा रहे तकादे, नोटिस और कार्रवाई का भय नहीं सताएगा। जनपद न्यायालय परिसर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में उनका मामला 1.10 लाख रुपये अदा कर निपट गया। इसके अलावा सात साल पहले सट्टे के मामले में लगातार कचहरी के चक्कर काटने से परेशान लालाराम को 100 रुपये जुर्माना अदा कर कानूनी कार्रवाई से छुटकारा मिल गया।

खैरपुरा निवासी सत्यभान सिंह ने अपने खेत पर वर्ष 2014 में भारतीय स्टेट बैंक की राजा का रामपुर शाखा से 95 हजार रुपये का कर्ज लिया था। समय पर कर्ज न चुकाने के कारण बैंक से तकादे शुरू हो गए। वहीं, ऋण धनराशि पर ब्याज और ब्याज पर भी ब्याज चढ़ने लगी। ऐसे में सत्यभान ने लोक अदालत की शरण ली। न्यायाधिकारियों की मौजूदगी में 2014 में लिए 95 हजार का लोन मय ब्याज के 1.10 लाख रुपये में भरवाकर मामले का निस्तारण किया गया। इससे सत्यभान खुश नजर आए। 

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एक अन्य मामले में कासगंज जिले के सहावर थाने के गांव गनेशपर निवासी लालाराम को शहर कोतवाली पुलिस ने 29 मार्च 2016 को सट्टे की खाईबाड़ी करते पकड़ा था। लोक अदालत में लालाराम ने जुर्म को स्वीकार कर लिया। जिस पर विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट योगेश कुमार ने उसको 100 रुपये जुर्माने से दंडित करते हुए पत्रावली बंद कर दी।

लोक अदालत का शुभारंभ करने के बाद जनपद न्यायाधीश अनुपम कुमार ने कहा कि लोक अदालतें विवादों को सुलह से निपटाने का सशक्त माध्यम होती हैं। संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कमालुद्दीन ने किया। नोडल अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह, अपर जिला जज प्रीति श्रीवास्तव, वीरभद्र, अली रजा, विकास गुप्ता, रामबाबू यादव, सिविल जज सीनियर डिवीजन कामायनी दुबे, एसीजेएम अनिल कुमार, मंगल देव सिंह, जेएम प्रियंबदा चौधरी आदि मौजूद रहे।

मुख्य द्वार पर अधिवक्ताओं ने किया प्रदर्शन

हापुड़ मामले को लेकर अधिवक्ताओं ने जनपद न्यायालय के मुख्य द्वारों पर खड़े होकर विरोध-प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार सिकरवार ने कहा कि जब शासन-प्रशासन हापुड़ के साथियों की आर्थिक और न्यायिक मदद को आगे नहीं आ रहा है तो फिर हम अधिवक्ताओं से अपने काम में मदद मांगने का शासन-प्रशासन तंत्र और न्याय तंत्र को कोई अधिकार नहीं है। 

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पहले हम अधिवक्ताओं को न्याय दिलाएं, इसके बाद हमसे सहयोग की अपेक्षा करें। बार काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश द्वारा आंदोलन जारी रखने के निर्देशों के तहत अधिवक्ता न्यायालय परिसर में नहीं घुसे। सुभाष शर्मा, पूर्व महासचिव राकेश यादव, संयुक्त सचिव अर्जुन यादव, संयुक्त सचिव जगन वार्ष्णेय, संजीव गुप्ता, जौय कुलश्रेष्ठ आदि अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया।

बरसात ने भी दिया अधिवक्ताओं के विरोध का साथ

हापुड़ कांड पर बार काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश द्वारा लिए गए आंदोलन जारी करने के निर्णय के चलते अधिवक्ताओं ने शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में काम न करने का निर्णय लिया। बार पदाधिकारी पूरी मुस्तैदी से इस निर्णय का पालन कराने के लिए न्यायालय परिसर के मुख्य द्वारों पर मौजूद रहे। वहीं उनके इस विरोध में बरसात भी साथ दे रही थी। बरसात की वजह से अदालत कक्षों के बाहर खुले में लगाए गए स्टॉल, टैंट आदि भीग गए। फरियादियों की संख्या पर भी असर पड़ा। 



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