A research by KGMU department on mental health of teenaged girls.

प्रतीकात्मक तस्वीर

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अच्छे फिगर की चाह किशोरियों को चिंता और अवसाद में ले जा रही है। केजीएमयू के फैमिली मेडिसिन और मानसिक रोग विभाग के शोध में यह सामने आया है। 200 किशोरियों पर अध्ययन के बाद यह शोधपत्र प्रकाशित किया है। इसके अनुसार ज्यादातर किशोरियों में खुद के फिगर को लेकर खराब अवधारणा है। इनकी मानसिक समस्याएं दूर करने के लिए स्क्रीनिंग की सिफारिश की गई है।

जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर में प्रकाशित अध्ययन में डॉ. शांभवी सिंह, डॉ. शिवेंद्र के सिंह, डॉ. सुजीत कुमार कर, डॉ. मनीष के मनार और डॉ. अभिषेक गुप्ता शामिल रहे। अध्ययन में सरकारी और निजी दोनों प्रकार के विद्यालयों की 200 छात्राओं को शामिल किया गया। कक्षा नौ से 12 साल तक की इन किशोरियां का विशेषज्ञों ने विस्तृत साक्षात्कार लिया और इसके आधार पर इनके मानसिक स्वास्थ्य की रिपोर्ट तैयार की। अध्ययन में पाया गया कि 63.5 प्रतिशत छात्राएं अपने फिगर को लेकर बेहद चिंता में थीं। 73 फीसदी अवसाद में थीं। इसमें भी 11.5 प्रतिशत छात्राओं की चिंता और 3.5 फीसदी की हालत अवसाद के मामले में बेहद गंभीर थी।

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एक तिहाई में मिली भविष्य के प्रति नाउम्मीदी

साक्षात्कार में पता चला कि 35.1 प्रतिशत छात्राओं की भविष्य के प्रति कोई उम्मीद नहीं थी। दो फीसदी छात्राओं ने माना कि बीते दो महीने में उनके मन में आत्महत्या का विचार आया और इसके चलते उन्होंने खुद को चोट तक पहुंचाई। अवसाद में रहने वाली ज्यादातर छात्राएं बोर्ड परीक्षा देने जा रही थीं। गंभीर मानसिक तनाव वाली 43.5 प्रतिशत छात्राएं 12वीं में थीं।

खुद को समझें, अभिभावक और शिक्षक करें प्रेरित

मनोचिकित्सक डॉ. सुजीत कुमार कर के मुताबिक देश में 20 फीसदी आबादी किशोरों की है। इसके बावजूद इनके मानसिक स्वास्थ्य की जांच और काउंसिलिंग को लेकर कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। यह वह उम्र है जब वे खुद का सबसे ज्यादा आकलन करते हैं। उन्हें लगता है कि उनमें कुछ कमी है। अपने गुण पहचानने के बजाय वे कमियों को लेकर चिंतित रहते हैं, जबकि उन्हें खुद को हीरो समझना चाहिए। माता-पिता और शिक्षकों को उन्हें प्रेरित करना चाहिए। उनकी खूबियों की तारीफ करनी चाहिए। उन्हें प्रेरक कहानियां सुनाएं और ऐसे उदाहरण दें, जिससे वे खुद को हीन न समझें।

कुछ सवाल जो किशोरियों से पूछे गए

सवाल — सकारात्मक

– क्या आपमें कोई गुण नहीं है? — 83.5 प्रतिशत

– क्या आपको खुद पर भरोसा है? — 17 प्रतिशत

– शारीरिक संरचना से संतुष्टि हैं? — 49 प्रतिशत

– समस्या के रहते हुए भी अच्छे समय की उम्मीद है? — 15 प्रतिशत

– समस्या में आत्महत्या का विचार आया? — 66.5 प्रतिशत

– भविष्य के प्रति आशावान हैं? — 20 प्रतिशत



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