
छात्रा का अस्पताल का होता इलाज।
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बिटिया के कभी एक मुहांसा हो जाता था तो वह डॉक्टर के पास पहुंच जाती थी। आज उसका पूरा चेहरा ही जल गया है। बिटिया को यह नहीं बताया है कि उसका चेहरा ज्यादा जल गया है।
यह बताते-बताते एसिड अटैक पीड़ित छात्रा की मां फफक कर रोने लगीं। उन्हें संभालते हुए छात्रा की बुआ और पिता कहते हैं कि बिटिया अपने चेहरे का बहुत ध्यान रखती थी। धूप में निकलने से पहले सन स्क्रीन लगाती थी और कपड़े से चेहरा ढकती थी। इसलिए हमने उससे मोबाइल ले लिया है। वह बार-बार कह रही है कि मोबाइल दे दीजिए। मुझे मेरे दोस्तों से बात करनी है। डर है कि अगर हम मोबाइल दे देंगे तो उसे सदमा लग सकता है।
मैं डरने वाली नहीं, फिर से शुरु करूंगी कॉलेज
छात्रा कहती हैं कि किसी के डराने या धमकाने से मैं डरने वाली नहीं हूं। लोगों की खराब नजरों का सामना करके दोगुनी हिम्मत से अपने भविष्य को संवारने के लिए कदम आगे बढ़ाउंगी। कहा कि जख्मों में दर्द है। हालात जो भी हों, पर मैं कभी हार नहीं मान सकती।
अचानक नींद से जाग जाती है छात्रा
छात्रा की मां को बेटी का दर्द देखा नहीं जा रहा। उनका कहना है कि रात में सोते समय बेटी अचानक उठ जाती है। डॉक्टर ने कहा है कि इलाज से सब ठीक हो जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो सर्जरी करने पर घाव और उसके निशान मिट जाएंगे।
