राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर एत्माद्दौला स्थित गांधी स्मारक का सन्नाटा टूटा। ताले में कैद स्मारक को खुलवाकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सफाई की और महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। मौन रखकर बापू को याद किया और बाद में प्रार्थना सभा में रामधुन गाई। इसके अलावा प्रतापपुरा, राजश्री टॉकीज समेत गांधी प्रतिमाओं और उसके आसपास नगर निगम ने सफाई कराई और रंगीन चूना डालने के साथ रंगोली भी बनाई।

अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में एत्माद्दौला स्थित गांधी स्मारक और शहर में राष्ट्रपिता की पांच प्रतिमाओं के आसपास गंदगी, कचरे के ढेर लगे होने की खबर प्रकाशित की थी। इस पर शुक्रवार दोपहर कांग्रेस कार्यकर्ता मनोज बोहरा, प्रमोद कुशवाहा, आरवी.धाकरे, अभय सिंह आदि ने गांधी स्मारक पहुंचकर ताला खुलवाया और सफाई की। 2 अक्तूबर को गांधी जयंती के बाद से यहां सन्नाटा पसरा था और ताला लगाकर स्मारक को बंद कर दिया गया था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रार्थना सभा के बाद रामधुन गाई। इस दौरान लता कुमारी, संतोष उपाध्याय, अशोक सागर, प्रदीप चंसोलिया, बांकेलाल, धर्मेंद्र शर्मा ,बसंत लाल आदि मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने किया था अनावरण, अब दो फूल भी न चढ़े

प्रतापपुरा चौराहे पर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा और इसके पास नगर निगम ने सफाई कराई और रंगीन चूना छिड़कवाया लेकिन पुण्यतिथि पर बापू को श्रद्धांजलि के दो फूल भी मयस्सर नहीं हो पाए। संगमरमर से बनी इस प्रतिमा का अनावरण करने के लिए 3 नवंबर 1969 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्त विशेष विमान से आगरा आए थे। इस आदमकद प्रतिमा का निर्माण वाराणसी के कलाकार गिर्राज प्रसाद ने किया था। स्व. मोतीलाल नेहरू प्रतिमा स्थापना समिति की ओर से 1966 में मोतीलाल नेहरू, 1968 में लाल बहादुर शास्त्री और फिर 1969 में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया गया। यहीं पर तत्कालीन सांसद अचल सिंह ने सीएम से यमुना में बांध बनाने, नया कारखाना लगाने और शाहजहां पार्क को मैसूर के बाग की तरह बनाने की मांग की थी।

 



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