
पानी टैंकर
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ताजनगरी आगरा के जलेसर रोड स्थित पटपरी गांव में मुख्य सड़क से कुछ अंदर जाने पर खेतों के बीच में कुछ टिनशेड पड़े हैं। इनमें ट्यूबवेल लगे हैं। यहीं खेतों के बीच में भूमिगत जलाशय बनाए हैं, जिन्हें दिन रात ट्यूबवेल चलाकर भरा जा रहा है।
यमुनापार के इलाके में जबरदस्त पानी के संकट को देखते हुए टैंकर माफिया ने इस तरह के जलाशय और ट्यूबवेल एक दो जगह नहीं, बल्कि 22 जगह पर बनाए हैं। इनके जरिए हर दिन हर ट्यूबवेल से 40 से 50 टैंकर पानी की सप्लाई यमुनापार में की जा रही है। टैंकर माफिया ने वाटरवर्क्स के समानांतर पानी की आपूर्ति का अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया है।
यमुनापार निवासी आदित्य और विकास ने बताया कि निजी ट्यूबवेलों से भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन के कारण आसपास का भूगर्भ जलस्तर नीचे चला गया है। हर साल 10 से 20 मीटर तक की गिरावट आ रही है। सबमर्सिबल पंप लगाने के लिए 400 फुट तक बोरिंग करानी पड़ रही है। जलेसर रोड पर जो निजी ट्यूबवेल लगाए गए हैं, वह अवैध हैं। इनका भूगर्भ जल विभाग में रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया गया है। वाटरवर्क्स की लाइन न होने के कारण यहां टैंकर माफिया पनप गए।
इन जगहों पर टैंकर से हो रही सप्लाई
यमुनापार जलेसर रोड, टेढ़ी बगिया, इस्लाम नगर, नरायच, कालिंदी विहार, शाहदरा, ट्रांस यमुना, रामबाग, 100 फुटा रोड की कालोनियों में टैंकर पानी की सप्लाई कर रहे हैं। हर ड्रम के लिए यह 50 रुपये और प्रति टैंकर 500 से 800 रुपये लेते हैं।
सरकारी ट्यूबवेल से पानी घरों तक पहुंच नहीं रहा। गरीब, मजदूर वर्ग को हर महीने 3 से 4 हजार रुपये निजी टैंकर से पानी खरीदने पर खर्च करने पड़ रहे हैं। – डॉ. यशपाल सिंह, पार्षद, नाई की सराय
खारे पानी में मिक्स कर रहे मीठा पानी
जलेसर रोड पर ट्यूबवेल का पानी खारा होने के कारण टैंकर माफिया ने जगह-जगह जलाशय बना लिए हैं, जिनमें आबिदगढ़, पीलीपोखर और छलेसर के पास झरना नाले में निजी ट्यूबवेलों से मीठा पानी लाकर जलाशय में मिला देते हैं। खारे पानी में इन जगहों से लाए मीठे पानी को मिक्स करके टैंकर बेचा जा रहा है। खेतों में बड़े बड़े जलाशयों के जरिए हर दिन टैंकरों को भरा जा रहा है।
पुरानी लाइनें खुदाई में क्षतिग्रस्त, इससे उठाया फायदा
यमुनापार में पानी के संकट को देखते हुए साल 2016 में तत्कालीन विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह ने नाई की सराय योजना के तहत 16 ट्यूबवेल लगवाए थे, लेकिन ट्यूबवेल खराब होते गए और भूगर्भ जल स्तर नीचे जाने से प्रेशर कम होता चला गया। इनमें से तीन से पांच ट्यूबवेल हमेशा खराब रहते हैं और 12 ट्यूबवेल का पानी एकदम खारा है। 400 फुट गहरी बोरिंग के कारण टंकी भी नहीं भर पा रही। जिस लाइन के जरिए पानी की सप्लाई होती है, उसका अधिकांश हिस्सा क्षतिग्रस्त है।
