यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शुक्रवार को सेतु निगम ने प्रभारी एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के समक्ष तीन एलिवेटेड रोड निर्माण का प्रजेंटेशन दिया था। शनिवार को एलिवेटेड रोड की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो गए।

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एवं चिकित्सक डॉ. संजय चतुर्वेदी ने बताया कि एलिवेटेड रोड से यातायात की समस्या घटने के बजाय बढ़ सकती है। उन्होंने कहा जब हम नई सड़कें या एलिवेटेड रोड बनाते हैं तो शुरुआत में ट्रैफिक कम लगता है। इसे देखकर वे लोग भी कारें निकालने लगते हैं जो पहले बस या ऑटो से चलते थे। इससे जाम की स्थिति वैसी ही हो जाती है।

उन्होंने सियोल का उदाहरण दिया। बताया कि सियोल ने 2003 में एक प्रमुख एलिवेटेड हाईवे को तोड़कर वहां एक प्राकृतिक जलधारा और पार्क विकसित किया। परिणाम चौंकाने वाले थे। ट्रैफिक कम हो गया, लोगों ने सार्वजनिक परिवहन का रुख किया और इलाके का तापमान भी गिर गया। एलिवेटेड रोड अक्सर पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों के लिए शहर को काट देते हैं।

डॉ. चतुर्वेदी ने सुझाव दिया है कि निवेश कंक्रीट के पुलों के बजाय मेट्रो, इलेक्ट्रिक बसों और चौड़े फुटपाथों पर होना चाहिए। वहीं, इस संबंध में जिलाधिकारी का कहना है कि विस्तृत सर्वे के बाद ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।

 



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