संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

Updated Tue, 26 Sep 2023 11:12 PM IST

कासगंज। बालिकाओं के बाढ़ के गड्ढे में फिसलने का हादसा सोमवार को हुआ, लेकिन इस हादसे का कोई चश्मदीद नहीं था। दोनों ही बालिकाएं एक साथ फिसलीं या एक दूसरे को बचाने के चक्कर में पानी में डूबीं कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन मौके पर कांस की घास पर बालिकाओं के फिसलने के निशान हादसे के गवाही दे रहे थे।

गीता (13) पुत्री किशन पाल के सात भाई बहन हैं। गीता पांचवे नंबर की थी। हादसे के बाद गीता के भाई बहन, माता पिता सभी चीत्कार कर रहे थे। क्योंकि गीता की उम्र भले ही कम थी, लेकिन वह परिवार के बीच जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभाती थी और इसी भूमिका को निभाने के लिए वह घास काटने गई। वहीं दूसरी बालिका सुषमा (12) पुत्री कैलाश चंद्र की मां नहीं हैं। वह अपने परिवार में सबसे छोटी है। सुषमा और गीता दोनों आपस में सहेलियां थीं और अक्सर साथ में ही घास काटने जाती थीं और साथ साथ ही इस हादसे का शिकार बनीं। गांव के सरकारी स्कूल में दोनों एक साथ कक्षा 4 में पढ़ती थीं। इस हादसे को लेकर दोनों परिवारों में इस बात का काफी मलाल था कि हादसे के दौरान कोई चश्मदीद होता तो बालिकाओं को बचाने का प्रयास कर पाते। गीता के पिता किशनपाल ने बताया कि सोमवार को इधर उधर गीता की तलाश करते रहे, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। वहीं सुषमा के पिता कैलाश चंद्र ने भी यही बात बताई।

सहायता का दिया भरोसा

कासगंज। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं जिला पंचायत अध्यक्ष रतनेश कश्यप के प्रतिनिधि बौबी कश्यप ने पीडि़त परिजनों से मुलाकात कर घटनाक्रम की जानकारी ली और उन्हें मदद का भरोसा दिया।



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